चिंता जीवित इंसान को भीतर ही भीतर जलाकर खोखला कर देती है : संत लोकेश

 




धमतरी, 27 जून (हि.स.)। सद्गुरु टेऊंराम नगर स्थित प्रेम प्रकाश आश्रम में आचार्य प्रवर सद्गुरु स्वामी टेऊँराम महाराज के पावन चालीहा महोत्सव के 18वें दिन भक्ति, सत्संग और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। आश्रम परिसर पूरे दिन राम नाम के संकीर्तन, भजन-कीर्तन और श्रद्धालुओं की आस्था से गुंजायमान रहा।

सत्संग में संत लोकेश ने चिंता के विषय पर प्रेरणादायी प्रवचन देते हुए कहा कि चिता केवल मृत शरीर को जलाती है, जबकि चिंता जीवित इंसान को भीतर ही भीतर जलाकर खोखला कर देती है। उन्होंने कहा कि जीवन में वास्तविक शांति का मार्ग भगवान का भजन, संतोष और अनावश्यक चिंताओं का त्याग है। मनुष्य चाहे जितने भी प्रयास कर ले, भगवत भजन के बिना सच्ची शांति प्राप्त नहीं हो सकती। प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से राम नाम का संकीर्तन किया। भावपूर्ण भजनों के माध्यम से ईश्वर स्मरण का संदेश ग्रहण किया।

संत ने कहा कि, प्रत्येक क्षण के साथ मनुष्य की सांसें कम होती जाती हैं, जबकि उसकी तृष्णाएं बढ़ती रहती हैं। प्रारब्ध के अनुसार जो प्राप्त होना है, वह अवश्य मिलेगा, इसलिए नश्वर संसार, विषय-विकार और रिश्तों की चिंता करने के बजाय मानव जीवन के कल्याण और आत्म उद्धार की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने आचार्य प्रवर द्वारा तिलंग राग में रचित करुणामयी प्रार्थना सुनले प्रभू प्यारे, यह है विनय हमारी... का मधुर गायन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजन में प्रभु से जीवन रूपी भवसागर से पार लगाने और अपने चरणों में शरण देने की प्रार्थना की गई। चालीसा पाठ, भजन-कीर्तन एवं विशाल भोजन भंडारे का आयोजन सिंधी पंचायत के पूर्व मुखी अमरापुरवासी सच्चानंद वाधवानी के परिवार- गोवर्धनदास, रामचंद, बंटी, दिनेशकुमार, मनीषकुमार और यश वाधवानी के सहयोग से संपन्न हुआ। पूरे आश्रम परिसर में दिनभर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने चालीसा पाठ, सत्संग, भजन और महाप्रसाद का लाभ प्राप्त किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा