बलरामपुर : मिशन आचार्य से शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी
हर बच्चे के सीखने, शिक्षक के निरंतर विकास और विद्यालय को उत्कृष्ट बनाने पर जोर
बलरामपुर, 07 अगस्त (हि.स.)। बलरामपुर जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को नई दिशा देने के लिए प्रशासन ने ‘मिशन आचार्य’ के तहत नई कार्ययोजना पर काम शुरू किया है। आज शुक्रवार को संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में जिले के प्राचार्यों के लिए प्रशिक्षण सह कार्यशाला एवं संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। इसमें विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को बेहतर करने और प्राचार्यों को प्रभावी नेतृत्व के लिए तैयार करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी की अध्यक्षता एवं जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी की उपस्थिति में आयोजित कार्यशाला में मिशन आचार्य के विजन, रणनीति, क्रियान्वयन ढांचे और उत्तरदायित्व आधारित कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। कलेक्टर ने प्राचार्यों से सीधे संवाद करते हुए विद्यालय स्तर पर बदलाव लाने के लिए मिशन की कार्ययोजना साझा की।
कार्यशाला में बताया गया कि मिशन आचार्य को केवल विभागीय कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने वाली पहल के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें प्रशासन, शिक्षक, अभिभावक, पंचायत, जनप्रतिनिधि और समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि मिशन आचार्य का उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। प्रत्येक बच्चे के सीखने के स्तर को समझना, उसकी क्षमता और कमियों की पहचान करना तथा जरूरत के अनुसार मार्गदर्शन देना शिक्षक और प्राचार्य की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल विद्यालयों के संचालन की नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की है, जहां प्रत्येक बच्चा अपनी कक्षा के अनुरूप सीख सके, शिक्षक निरंतर सीखते रहें और हर विद्यालय उत्कृष्टता का केंद्र बने। मिशन की सफलता बैठकों और गतिविधियों की संख्या से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर और विद्यालयों के प्रदर्शन से मापी जाएगी।
कलेक्टर ने कहा कि बचपन जीवन का ऐसा पड़ाव है जो दोबारा लौटकर नहीं आता। इसलिए शिक्षकों को बच्चों की चुनौतियों को पहचानकर उनका समाधान करना होगा, ताकि विद्यालय बच्चों के लिए बोझ नहीं बल्कि सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने का स्थान बने। उन्होंने प्राचार्यों से लगातार सीखते रहने और विद्यार्थियों के हित में निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि विद्यालय का भविष्य काफी हद तक प्राचार्य के नेतृत्व पर निर्भर करता है। यदि प्राचार्य स्वयं सीखने और बदलाव के लिए तैयार रहते हैं तो शिक्षक भी प्रेरित होते हैं और इसका सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों के सीखने पर दिखाई देता है।
उन्होंने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने, जिज्ञासा, आत्मविश्वास और रचनात्मक सोच विकसित करने तथा प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ाने के लिए विद्यालय स्तर पर आवश्यक प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का स्तर केवल परीक्षा परिणामों से नहीं, बल्कि कक्षा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नियमित शैक्षणिक समीक्षा, नवाचार, शिक्षक मार्गदर्शन और सकारात्मक सीखने के वातावरण से बेहतर होता है।
कार्यशाला में मिशन आचार्य के पांच प्रमुख स्तंभ सक्षम विद्यार्थी, सक्षम शिक्षक, सक्षम विद्यालय, सक्षम समाज और सक्षम प्रशासन पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही रीडिंग मिशन, होम रीडिंग कार्यक्रम, सामुदायिक पठन अभियान, रेमेडियल लर्निंग, शिक्षक क्षमता संवर्धन, एआई आधारित शिक्षण सहयोग, स्कूल परफॉर्मेंस इंडेक्स और रियल-टाइम जिला शिक्षा डैशबोर्ड जैसी नवाचारी पहलों का भी प्रस्तुतीकरण किया गया।
कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों, प्राचार्यों, बीईओ और बीआरसी ने मिशन आचार्य को सफल बनाने तथा जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए समन्वित प्रयास करने का संकल्प लिया।
कार्यशाला में जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव, डीएमसी चन्द्रभूषण गुप्ता सहित जिले के प्राचार्यगण मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय