57वीं जीएसटी परिषद के ऐतिहासिक फैसलों से व्यापारियों को बड़ी राहत : वित्त मंत्री ओपी चौधरी

 




रायपुर, 08 अक्टूबर (हि.स.)। नई दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में व्यापारियों, उद्यमियों और उद्योग जगत को बड़ी राहत देने वाले अनेक महत्वपूर्ण प्रक्रियागत सुधारों की सिफारिश की गई है। बैठक में शामिल छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इन निर्णयों को व्यापार सुगमता, कर प्रशासन में पारदर्शिता और उद्यमिता को प्रोत्साहन देने की दिशा में युगांतकारी सुधार बताया है।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक सुधारों के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल कर संग्रहण बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद कर प्रणाली विकसित करना है, जो व्यापारियों को सुविधा दे, उद्यमिता को प्रोत्साहित करे और देश की आर्थिक प्रगति को गति प्रदान करे।

वित्त मंत्री चौधरी ने बैठक के उपरांत कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में प्रक्रियागत सुधारों और प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। इन सुधारों का उद्देश्य व्यापारियों पर अनावश्यक अनुपालन बोझ कम करना, कर प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाना और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।

वित्त मंत्री चौधरी ने आज बताया कि जीएसटी परिषद ने कर कानून से गिरफ्तारी की शक्ति से संबंधित धारा 69 को हटाने की महत्वपूर्ण सिफारिश की है। इसके साथ ही मुकदमा चलाने के लिए कर राशि की सीमा वर्तमान एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। सामान्य जुर्माने की राशि भी 25 हजार रुपये से घटाकर अधिकतम 10 हजार रुपये करने की सिफारिश की गई है।

वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि ई-वे बिल की जांच से संबंधित प्रक्रियाओं में भी महत्वपूर्ण सुधार प्रस्तावित किए गए हैं। नए प्रावधानों के अनुसार किसी मालवाहक वाहन को जांच के लिए रोकने से पहले ठोस सूचना होना आवश्यक होगा। इसके लिए संयुक्त आयुक्त अथवा उससे उच्चस्तर के अधिकारी की अनुमति भी अनिवार्य होगी। उन्होंने बताया कि ई-वे बिल की जांच संबंधित राज्य में ही की जा सकेगी, जहां माल भेजने वाला अथवा प्राप्त करने वाला स्थित हो। केवल रास्ते में पड़ने वाले राज्यों में मालवाहक वाहनों को जांच के नाम पर नहीं रोका जाएगा।

वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि जीएसटी रिफंड प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों की सिफारिश की गई है। इसके अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा अतिरिक्त राशि का पूरा रिफंड सिस्टम द्वारा स्वतः स्वीकृत किया जा सकेगा। इसके लिए किसी अधिकारी की अलग से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

उन्होंने बताया कि निर्यात और उलटे शुल्क ढांचे से संबंधित मामलों में रिफंड दावे की 90 प्रतिशत राशि तत्काल मंजूर करने का प्रावधान प्रस्तावित है। साथ ही रिफंड आवेदन की जांच की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने की सिफारिश की गई है।

वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि जीएसटी पंजीयन और उसमें संशोधन की प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत मुख्य व्यवसाय स्थल को छोड़कर पंजीयन संबंधी अन्य जानकारियों में संशोधन पोर्टल के माध्यम से स्वतः किया जा सकेगा। इसी प्रकार पंजीयन निरस्त कराने की प्रक्रिया भी अधिक सरल और स्वचालित होगी।

उन्होंने बताया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से वस्तुओं की बिक्री करने वाले छोटे व्यापारियों को भी राहत देने की सिफारिश की गई है। ऐसे विक्रेताओं को प्रत्येक राज्य में अलग कार्यालय स्थापित करने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी।

वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा का दायरा बढ़ाने संबंधी महत्वपूर्ण सिफारिशें भी की हैं। प्रस्तावित प्रावधानों के अंतर्गत आउटडोर कैटरिंग, स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर तथा फैक्ट्री परिसर के बाहर स्थापित पाइपलाइन पर भी पात्रता के अनुसार इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि जीएसटी परिषद की सिफारिशों में छोटे व्यापारियों और सामान्य करदाताओं को अनावश्यक कानूनी एवं आर्थिक बोझ से राहत देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार 10 हजार रुपये से कम कर राशि वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार धोखाधड़ी से संबंधित नहीं होने वाले मामलों में निर्धारित समय के भीतर कर और ब्याज जमा करने पर केवल पांच प्रतिशत जुर्माना लगाने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने बताया कि पांच करोड़ रुपये तक वार्षिक टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों को रिटर्न दाखिल करने में देरी होने पर भी राहत मिलेगी। यदि ऐसे व्यापारी संबंधित महीने के अंत तक अपना रिटर्न दाखिल कर देते हैं, तो उन्हें विलंब शुल्क से छूट देने की सिफारिश की गई है।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि जीएसटी परिषद द्वारा प्रस्तावित इन प्रक्रियागत सुधारों को आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा