लोहंडीगुड़ा में इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर ब्रीडिंग सेंटर से 15 किसानों को मिले 600 चूजे
जगदलपुर, 10 सितंबर (हि.स.)। ग्रामीण अंचल में स्वरोजगार और आजीविका संवर्धन की दिशा में संचालित इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर परियोजना अंतर्गत लोहंडीगुड़ा ब्लॉक में स्थापित ब्रीडिंग सेंटर स्थानीयस्तर पर ग्रामीण उद्यमिता और बैकयार्ड कुक्कुट पालन का एक सशक्त मॉडल बनकर उभरा है।
इस केंद्र के माध्यम से स्थानीय उद्यमी वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाते हुए एक दिन के नवजात चूजों की पंद्रह दिनों तक विशेष देख-रेख और रूडिंग कर रहे हैं। इस नाजुक शुरुआती दौर में नियंत्रित तापमान, समयबद्ध टीकाकरण और संतुलित पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर चूजों की मृत्यु दर को न के बराबर रखने में सफलता मिली है।
इसी वैज्ञानिक प्रबंधन की बदौलत तैयार बैच से पंद्रह स्थानीय किसानों को 600 स्वस्थ एवं टीकाकृत चूजों का सफल वितरण किया गया है। सुचारू पालन-पोषण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किसानों को चूजों के साथ फीडर और ड्रिंकर भी मुहैया कराए गए हैं। सामान्यतः एक दिन के अत्यंत नाजुक चूजों के पालन में किसानों को भारी जोखिम और मृत्यु दर का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब पंद्रह दिन के मजबूत चूजे सीधे गांव में ही मिलने से उनका आर्थिक जोखिम घट गया है और देखरेख भी काफी आसान हो गई है।
इस नवाचार से जहां एक ओर स्थानीय महिला किसानों को गांव में ही टीकाकृत व स्वस्थ चूजे मिलने से समय और परिवहन खर्च की बचत हो रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्र का संचालन कर रहे उद्यमी के लिए यह नियमित व स्थायी आय का एक मजबूत जरिया साबित हुआ है। तकनीक और स्थानीय उद्यमिता के इस बेहतरीन तालमेल ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर से जुड़े गांवों में पारंपरिक बैकयार्ड पोल्ट्री को नई मजबूती प्रदान करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे