सिमराही में वैश्य महासम्मेलन का आयोजन, केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की मांग उठी

 






सुपौल, 07 जून (हि.स.)। जिले के सिमराही बाजार स्थित एक होटल परिसर में रविवार को अखिल सिंदुरिया बनिया, कथबनिया एवं कैथल वैश्य महासभा के बैनर तले पांचवां स्थापना दिवस सह राष्ट्रीय महासम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में बिहार समेत देश के कई राज्यों से आए समाज के हजारों लोगों ने भाग लेकर संगठन की एकजुटता और सामाजिक शक्ति का परिचय दिया।महासम्मेलन का उद्घाटन प्रेम कुमार, शीला मंडल तथा दिलेश्वर कामैत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सम्मेलन में बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से भी बड़ी संख्या में प्रतिनिधि पहुंचे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि किसी भी संगठन का स्थापना दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं होता, बल्कि उसके संघर्ष, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा तय करने का भी महत्वपूर्ण मंच होता है। उन्होंने कहा कि वैश्य समाज ने देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार, उद्योग और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा ईमानदारी, परिश्रम और उद्यमिता की परंपरा को मजबूत किया है।उन्होंने शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और संगठनात्मक मजबूती को समाज के विकास का आधार बताते हुए युवाओं से आधुनिक शिक्षा, तकनीक और नवाचार को अपनाने का आह्वान किया। साथ ही महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को समाज की उन्नति के लिए आवश्यक बताया।

उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और सभी वर्गों के बीच सहयोग की भावना ही राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है।सम्मेलन के दौरान महासभा की ओर से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया।

इसमें कथबनिया एवं कैथल वैश्य समुदाय को केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची में सिंदुरिया बनिया जाति के साथ शामिल कराने के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को अनुशंसा भेजने की मांग की गई। महासभा का कहना है कि तीनों समुदाय मूल रूप से एक ही जाति के अलग-अलग उपनाम हैं और इनके बीच लंबे समय से सामाजिक एवं वैवाहिक संबंध मौजूद हैं।

इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के समक्ष समाज की मांग रखेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि कथबनिया और कैथल वैश्य समुदाय को भी केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल कराने के प्रयास सफल होंगे।साथ ही उन्होंने जनसंख्या के अनुपात में समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलने की आवश्यकता पर बल दिया।

महासम्मेलन की अध्यक्षता महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद कुमार दास ने की। कार्यक्रम के संरक्षक बिरेंद्र दास और संयोजक अभिनंदन दास रहे। सम्मेलन के अंत में समाज की एकता, शिक्षा, संगठन और अधिकारों के लिए संघर्ष को और मजबूत करने का संकल्प लिया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र