मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बने शिक्षक, डाइट बसहा में पांच दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न
सुपौल, 19 जून (हि.स.)। बदलते शैक्षिक और सामाजिक परिवेश में शिक्षकों की भूमिका केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रह गई है। विद्यार्थियों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास में भी शिक्षकों की अहम जिम्मेदारी होती है। इसी उद्देश्य को लेकर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) बसहा में 15 से 19 जून तक आयोजित मानसिक स्वास्थ्य एवं भावात्मक कल्याण विषयक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विद्यालयों से आए 127 शिक्षकों ने भाग लिया। पांच दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक जागरूकता, सहयोगीकरण के कौशल, संबंध प्रबंधन, समस्या समाधान, भावात्मक समझ और सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की भावनात्मक एवं मानसिक दक्षताओं का विकास करना था, ताकि वे विद्यालयों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।समापन अवसर पर प्रभारी प्राचार्य अखलाक खान ने कहा कि आज के समय में शिक्षकों का मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत होना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास न केवल एक शिक्षक को बेहतर बनाते हैं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से सशक्त व्यक्ति ही अपने परिवार, विद्यालय और समाज के विकास में सार्थक भूमिका निभा सकता है। शिक्षकों को आदर्श आचरण और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की भी उन्होंने सलाह दी।
प्रशिक्षण प्रभारी मो. आफताब आलम ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और भावात्मक कल्याण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकताओं में से एक है। उन्होंने बताया कि तनावपूर्ण जीवनशैली और बढ़ती चुनौतियों के बीच मानसिक रूप से स्वस्थ रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने तनाव प्रबंधन, आत्म-जागरूकता, सकारात्मक सोच, सहयोगी संबंधों का निर्माण तथा संतुलित जीवनशैली को मानसिक स्वास्थ्य की बुनियादी आवश्यकताएं बताते हुए इन्हें दैनिक जीवन में अपनाने पर जोर दिया।
प्रशिक्षण के दौरान व्याख्याता अभिषेक कुमार, निरंजन कुमार, मदन कुमार, इम्तेयाज अनवर तथा प्रशिक्षिका सुषमा श्रेष्ठा ने विभिन्न सत्रों का संचालन किया।
प्रशिक्षकों ने समूह चर्चा, सहभागितापूर्ण गतिविधियों और व्यवहारिक अभ्यासों के माध्यम से शिक्षकों को विषय से जोड़ने का प्रयास किया।कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी और व्यवहारिक बताते हुए कहा कि इससे उन्हें विद्यार्थियों और सहकर्मियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने, भावनात्मक चुनौतियों को समझने तथा मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अधिक संवेदनशील बनने में मदद मिलेगी।
शिक्षकों ने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र