कौशल से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े विचाराधीन बंदी

 




सुपौल, 18 सितंबर (हि.स.)। जेल की चारदीवारी के भीतर कौशल विकास के जरिए बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जा रही है। मरिचा स्थित भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), सुपौल के सहयोग से मंडल कारा, सुपौल में आयोजित 12 दिवसीय घरेलू अगरबत्ती निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ।

समापन समारोह में मंडल कारा अधीक्षक मोतीलाल एवं आरसेटी निदेशक टी.एस. केरकेट्टा ने प्रशिक्षुओं के बीच प्रमाण पत्र वितरित किए। मंडल कारा अधीक्षक मोतीलाल ने बंदियों को स्वरोजगारपरक प्रशिक्षण देने के लिए आरसेटी की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण बंदियों को सकारात्मक दिशा देने के साथ जेल से बाहर निकलने के बाद सम्मानजनक जीवन जीने में सहायक साबित होंगे।

आरसेटी निदेशक टी.एस. केरकेट्टा ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य विभिन्न प्रशिक्षणों के माध्यम से लोगों में कौशल विकसित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। बंदियों को अगरबत्ती निर्माण का प्रशिक्षण देने का उद्देश्य उन्हें उपयोगी हुनर से जोड़ना है, ताकि वे भविष्य में स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि आरसेटी के विभिन्न प्रशिक्षणों के जरिए युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने का प्रयास किया जाता है।

प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षक सुप्रिया ने अगरबत्ती निर्माण में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न मसाले, केमिकल, सेंट एवं अन्य कच्चे माल की जानकारी दी। प्रशिक्षुओं को अगरबत्ती की पैकिंग, ब्रांडिंग और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर आवश्यक सावधानियों और उपायों की जानकारी दी गई।

ईडीपी प्रशिक्षक सह कार्यक्रम समन्वयक अनिश रंजन ने व्यवसाय संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने बाजार एवं विपणन, ग्राहक की मांग, उत्पाद की गुणवत्ता, मूल्य निर्धारण, बैंकिंग, ऋण सुविधा और प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने सहित व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया के बारे में प्रशिक्षुओं को बताया। उन्होंने कहा कि अगरबत्ती निर्माण का व्यवसाय उचित योजना और बाजार की समझ के साथ छोटे स्तर से शुरू किया जा सकता है।

प्रशिक्षण जेल परिसर तक सीमित नहीं रहेगा। बंदियों के बाहर आने के बाद भी आरसेटी उनसे संपर्क कर व्यवसाय शुरू करने में आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन देगा। प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बैंकिंग, ऋण प्रक्रिया और बाजार से जुड़ने में भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

वही राकेश कुमार गियर ने कहा कि बंदियों को हुनरमंद बनाकर उन्हें सकारात्मक दिशा देना उद्देश्य है। इसके लिए आरसेटी लगातार प्रशिक्षण और सहयोग उपलब्ध कराने को तत्पर है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। प्रशिक्षुओं ने अगरबत्ती निर्माण के साथ पैकिंग, ब्रांडिंग, विपणन एवं व्यवसाय संचालन की जानकारी मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र