योग से संवर रहा स्वास्थ्य, योग शिक्षिका रीतिका ने बताए निरोगी रहने के अचूक मंत्र

 


भागलपुर, 12 अगस्त (हि.स.)। आज की आधुनिक जीवनशैली, काम के बढ़ते दबाव और खान-पान की गलत आदतों के कारण मानव शरीर बीमारियों का घर बनता जा रहा है। डाइबिटीज, उच्च रक्तचाप और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं अब आम हो चुकी हैं। इस चुनौतीपूर्ण दौर में सुप्रसिद्ध योग शिक्षिका रीतिका लोगों को योग के माध्यम से एक स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की नई राह दिखा रही हैं।

रीतिका का मानना है कि दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय यदि हम योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें, तो एक दीर्घायु और निरोगी जीवन पाया जा सकता है। योग शिक्षिका रीतिका कहती हैं, लोग अक्सर योग को केवल शारीरिक तोड़-मरोड़ या कसरत समझ लेते हैं, जबकि यह इससे कहीं ऊपर है। योग हमारे शरीर, मन और आत्मा के बीच एक गहरा सामंजस्य स्थापित करता है।

उनका कहना है कि आज के समय में शारीरिक बीमारियों से कहीं ज्यादा लोग मानसिक विकारों से जूझ रहे हैं। योग न केवल हमारे अंगों को मजबूती देता है, बल्कि हमारे मस्तिष्क में सकारात्मक रसायनों का स्राव बढ़ाकर तनाव को जड़ से खत्म करता है। रीतिका ने दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए पांच अत्यंत प्रभावी आसनों और प्राणायाम की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया है। ताड़ासन रीढ़ की हड्डी को सीधा और लचीला बनाता है। इससे पूरे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और शारीरिक संतुलन बेहतर होता है। त्रिकोणासन कमर और पेट के आसपास की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में सहायक है। यह फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता है और पाचन तंत्र को सक्रिय करता है। भुजंगासन कंप्यूटर के सामने घंटों बैठने वाले पेशेवरों के लिए यह वरदान है। यह पीठ के निचले हिस्से के दर्द को दूर करता है और रीढ़ को मजबूती देता है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम फेफड़ों को शुद्ध ऑक्सीजन पहुंचाता है। यह नसों के ब्लॉकेज को खोलता है और मानसिक एकाग्रता को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होता है। शवासन सभी आसनों के अंत में किया जाने वाला यह आसन शरीर को गहरी शिथिलता देता है। यह उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) और अनिद्रा की समस्या को दूर करता है।

रीतिका के अनुसार, व्यस्तता का बहाना बनाकर स्वास्थ्य से समझौता करना खुद के साथ अन्याय है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन सुबह मात्र तीस मिनट का समय योग को देता है, तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) इतनी मजबूत हो जाती है कि मौसमी बीमारियां उसके पास भी नहीं फटकतीं। योग से शरीर के भीतर जमी टॉक्सिंस (विषाक्त पदार्थ) बाहर निकल जाते हैं, जिससे त्वचा पर प्राकृतिक चमक आती है और उम्र का असर कम होता है।

अंत में रीतिका ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि एक समृद्ध राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब वहां का नागरिक शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो। उन्होंने अपील की है कि योग को किसी धर्म या वर्ग से न जोड़कर, इसे एक वैज्ञानिक जीवन पद्धति के रूप में हर घर के आंगन तक पहुंचाया जाना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर