रुईधासा महाकाल मंदिर में मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

 


किशनगंज, 13 अक्टूबर (हि.स.)। शहर के रुईधासा स्थित महाकाल मंदिर में मंगलवार को शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। सुबह से ही मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। मंदिर के पुरोहित गुरु साकेत के सानिध्य में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया।

मंदिर के पुरोहित गुरु साकेत ने बताया कि नवरात्र का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है। मां चंद्रघंटा को साहस, शौर्य और शक्ति की देवी माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि उनकी आराधना से भक्तों के मन का भय दूर होता है तथा कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए आत्मबल और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।

गुरु साकेत ने बताया कि मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है, जिसके कारण उन्हें मां चंद्रघंटा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें शक्ति, शौर्य और दुष्टों का संहार करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। उनके हाथों में सुशोभित अस्त्र-शस्त्र भक्तों को निर्भय होकर जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने बताया कि मां चंद्रघंटा को सफेद रंग की मिठाइयां, खीर और चमेली के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान 'ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः' मंत्र का जाप करने की भी विशेष महत्ता है। श्रद्धा और एकाग्रता से मंत्र जाप करने पर मन को शांति मिलने तथा आत्मविश्वास बढ़ने की मान्यता है। नवरात्र के तीसरे दिन लाल रंग के वस्त्र धारण करना भी शुभ माना जाता है। महाकाल मंदिर में मां दुर्गा की पूजा के साथ महाकाल बाबा की भी नियमित आराधना की जाती है। यहां किशनगंज के अलावा आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। संध्या के समय मंदिर में आरती का आयोजन किया जाता है, जिसमें भक्त शामिल होकर माता से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्र के अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह