विक्रमशिला सेतु बंद होने से आयी आफत के बीच नाव पर महिला ने दिया बच्चे को जन्म
भागलपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। विक्रमशिला सेतु के बंद होने से भागलपुर और नवगछिया के बीच गंगा पार आवागमन करने वाले आम लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस विकट स्थिति के बीच शुक्रवार को गंगा की लहरों पर एक चमत्कारी और राहत भरी तस्वीर देखने को मिली। यहां एसडीआरएफ की नाव पर ही एक गर्भवती महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। वहीं, प्रशासन की तत्परता से एक अन्य गंभीर रूप से बीमार 84 वर्षीय बुजुर्ग को भी मोटरबोट के जरिए सुरक्षित नदी पार कराकर अस्पताल पहुंचाया गया। पहली घटना इस्माइलपुर थाना क्षेत्र की है। यहां के जयमंगल टोला की रहने वाली संगीता देवी जाह्नवी चौक घाट से बियाडा घाट पहुंची थीं। घाट पर कदम रखते ही उन्हें अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। पुल बंद होने के कारण तत्काल अस्पताल पहुंचना असंभव था। स्थिति बिगड़ती देख वहां तैनात मेडिकल टीम से फौरन मदद मांगी गई। इसी आपाधापी के बीच एसडीआरएफ की नाव पर ही महिला ने एक नवजात को जन्म दिया। इस दौरान एक सुखद संयोग यह भी रहा कि नाव पर मौजूद तीन अन्य महिला यात्रियों ने खुद को एएनएम बताते हुए तुरंत जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने सूझबूझ से सुरक्षित प्रसव कराया और नवजात की प्राथमिक जांच भी की। सजगता और हौसले के कारण फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं। दूसरी राहत भरी खबर नवगछिया के खैरपुर कदवा से सामने आई। यहां के निवासी 84 वर्षीय बुजुर्ग रामदास यादव की तबीयत अचानक बेहद गंभीर हो गई। विक्रमशिला सेतु पर वाहनों का परिचालन ठप होने के कारण उन्हें इलाज के लिए भागलपुर ले जाना एक बड़ी चुनौती बन गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कदम उठाया। तुरंत एसडीआरएफ की मोटरबोट की व्यवस्था कर बुजुर्ग को सुरक्षित तरीके से गंगा पार कराया गया, जिसके बाद उन्हें समय पर अस्पताल में भर्ती कराया जा सका। इन दोनों घटनाओं ने जहां एक तरफ राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ नदी पार के इलाकों में वैकल्पिक और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी है। विक्रमशिला सेतु बंद होने से हर दिन गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों की जान आफत में फंस रही है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि जब तक सेतु बहाल नहीं होता, तब तक इस रूट पर एम्बुलेंस, पुख्ता परिवहन और घाटों पर 24 घंटे आपातकालीन चिकित्सा दल की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर