व्रत के दौरान कलश पूजा कर रही महिला की तबीयत बिगड़ी, डॉक्टरों ने दी इलाज कराने की सलाह

 


सुपौल, 17 अक्टूबर (हि.स.)। मां दुर्गा के प्रति अटूट आस्था के बीच त्रिवेणीगंज में कलश स्थापित कर पूजा-अर्चना कर रही एक महिला की तबीयत बिगड़ गई। महिला नौ दिनों से अन्न ग्रहण किए बिना दाहिने हाथ पर कलश रखकर आराधना कर रही हैं।

जांच में उनका रक्तचाप असामान्य पाया गया। साथ ही नाड़ी और हृदय गति में भी गड़बड़ी सामने आई है। डॉक्टरों ने तत्काल इलाज कराने और व्रत समाप्त कर जरूरी दवाइयां लेने की सलाह दी है। थाना क्षेत्र के कुशहा वार्ड सात निवासी रामचंद्र सरदार की पत्नी गुड्डी देवी नवरात्र के दौरान मेला मैदान स्थित दुर्गा मंदिर में 11 अक्टूबर से दाहिने हाथ पर कलश स्थापित कर पूजा कर रही हैं। शुक्रवार को स्वास्थ्य जांच के दौरान उनकी तबीयत को लेकर चिंता सामने आई। अनुमंडलीय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. उमेश कुमार ने दोबारा जांच के बाद बताया कि महिला हृदय रोग से पीड़ित हैं। व्रत के कारण दवाइयां बंद करने से उनकी स्थिति गंभीर हो सकती है।

डॉक्टरों ने परिजनों को महिला का व्रत समाप्त कराकर तत्काल इलाज शुरू कराने की सलाह दी है। हालांकि, गुड्डी देवी और उनके परिजन इलाज कराने तथा व्रत तोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम उन्हें समझाने का प्रयास कर रही है। गुड्डी देवी ने अपने पिता वासुदेव सरदार की तबीयत में सुधार के लिए मां दुर्गा से मन्नत मांगी थी। कुछ महीने पहले उनके पिता को लकवा का दौरा पड़ा था। कई जगह इलाज कराने के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा था। वह चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गए थे। महिला के अनुसार, मन्नत मांगने के चार-पांच दिन बाद ही उनके पिता की तबीयत में सुधार होने लगा। इसके बाद उन्होंने नवरात्र में नौ दिनों तक अन्न ग्रहण किए बिना हाथ पर कलश स्थापित कर पूजा करने का संकल्प लिया। अब वह अपनी मन्नत पूरी करने में जुटी हैं।

गुड्डी देवी को भरोसा है कि मां दुर्गा उनकी रक्षा करेंगी। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम उन्हें लगातार समझा रही है कि हृदय रोग की स्थिति में दवाइयां बंद करना और बिना चिकित्सकीय सलाह के उपवास जारी रखना जानलेवा साबित हो सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र