विक्रमशिला सेतु का कायाकल्प: जंग से बचाने के लिए स्टील गार्डरों पर हो रही 'सिल्वर कोटिंग'
भागलपुर, 31 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर और दक्षिण बिहार की लाइफलाइन कहे जाने वाले भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन का कार्य इन दिनों युद्ध स्तर पर जारी है। पुल को नया जीवन देने और इसकी मजबूती बढ़ाने के लिए इस बार कंक्रीट की जगह अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है। इसी कड़ी में, सेतु पर स्थापित किए जा रहे नए स्टील गर्डर्स को लंबे समय तक जंग से सुरक्षित रखने के लिए उन पर एक विशेष 'सिल्वर कोटिंग' की जा रही है। अमूमन किसी भी पुल के निर्माण कार्य के पूरा होने के बाद गर्डरों पर पेंट या एंटी-कोर्सिव परत चढ़ाई जाती है, लेकिन विक्रमशिला सेतु के मामले में यह काम निर्माण के दौरान ही यार्ड में असेंबलिंग के वक्त किया जा रहा है। अभियंताओं के मुताबिक, गंगा नदी के ऊपर अत्यधिक जलवाष्प, हवा में नमी और मानसूनी बारिश के कारण लोहे के ढांचे में जंग लगने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। यह सिल्वर कोटिंग स्टील के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेगी, जिससे पुल की उम्र कई दशक बढ़ जाएगी। इस विशेष कोटिंग की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कड़े नियम तय किए गए हैं। गर्डर के वजन के हिसाब से की जा रही इस कोटिंग की मोटाई को जांचने के लिए 'माइक्रोन जांच' की जा रही है। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोटिंग स्टील की सतह पर पूरी मजबूती से चिपकी है, 'एड्हेशियन टेस्ट' भी किया जा रहा है। निर्माण एजेंसी द्वारा किए जा रहे इस कार्य की निष्पक्ष जांच के लिए आईआईटी और एनआईटी के सिविल और मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग विभागों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। सेतु के पुनर्स्थापन कार्य के तहत न केवल क्षतिग्रस्त कंक्रीट स्लैब को बदला जा रहा है, बल्कि पुल के कुल भार को कम करने की योजना पर भी काम चल रहा है। वर्षों पुराने भारी-भरकम आरसीसी रेलिंग और फुटपाथ को काटकर हटाया जा रहा है और उनकी जगह हल्के तथा मजबूत स्टील के नए ढांचे लगाए जा रहे हैं। पुल निर्माण निगम के अनुसार, पुल के सबसे कमजोर स्लैब और पुराने कंक्रीट गर्डर को सफलतापूर्वक काटने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब करीब 200 टन वजनी नए स्टील गर्डर की लॉन्चिंग के लिए पिलरों पर बेयरिंग सेट करने का काम चल रहा है। यार्ड में कोटिंग के बाद इन भारी गर्डर्स को सेतु पर चढ़ाया जाएगा, जिसके बाद लॉन्चिंग के समय इन पर सिल्वर कोटिंग की एक और अंतिम परत लगाई जाएगी। इसके साथ ही पुल के 67 एक्सपेंशन ज्वाइंट और इंस्पेक्शन चैंबर भी पूरी तरह बदले जा रहे हैं, जिसके लिए कोलकाता और भोपाल से नए ज्वाइंट मंगाए जा रहे हैं। निर्माण एजेंसी को आगामी 14 जनवरी तक हर हाल में मरम्मत का कार्य पूरा कर यातायात बहाल करने की समय-सीमा दी गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर