वेतन कटौती पर टीएमबीयू में बवाल: तीन दिनों से कामकाज ठप, आंदोलन के समर्थन में उतरे एमएलसी

 


भागलपुर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में शिक्षकेतर कर्मचारियों के वेतन में कटौती को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुक्रवार को तीसरे दिन भी पूरी मुस्तैदी के साथ जारी रही। इस आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन, परीक्षा विभाग, पीजी विभागों और सभी संबद्ध कॉलेजों में तालाबंदी रही, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है।

आंदोलन के तीसरे दिन उस वक्त सियासी और प्रशासनिक सरगर्मी बढ़ गई, जब विधान पार्षद सह सिंडिकेट सदस्य डॉक्टर संजीव सिंह खुद धरना स्थल पर आंदोलित कर्मचारियों का समर्थन करने पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों को पूरी तरह से जायज ठहराते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति पर तीखा हमला बोला। एमएलसी संजीव सिंह ने कड़े लहजे में कहा कि विश्वविद्यालय इस वक्त पूरी तरह 'नशे में चल रहा है' और ऐसी चरमराती प्रशासनिक व्यवस्था को देखते हुए कुलपति को अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

महासंघ के प्रक्षेत्रीय मंत्री सुशील मंडल के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में कर्मचारियों का आरोप है कि जून महीने से लगातार पिछले तीन महीनों से बिना किसी पूर्व सूचना और उचित कारण के उनके वेतन में लगभग 60 प्रतिशत की भारी कटौती की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि जब बाढ़ के समय कामकाज बाधित था, तब एक साजिश के तहत यह कटौती की गई। जिस पत्र का हवाला देकर प्रशासन ने यह कदम उठाया है, वह विवि पर लागू ही नहीं होता। वेतन कटौती के साथ-साथ वर्षों से लंबित प्रमोशन का मामला भी इस आंदोलन की मुख्य वजहों में से एक है।

महामुख्यालय के सभी प्रमुख कॉलेजों जैसे टीएनबी कॉलेज, बीएन कॉलेज सहित पीजी जूलॉजी, बॉटनी, केमिस्ट्री और फिजिक्स विभागों में पूरी तरह ताला लटका हुआ है। प्रशासनिक भवन में तालाबंदी की आशंका को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारी पहले ही कार्यालयों से निकल गए थे। कामकाज ठप होने की वजह से दूर-दराज से आए छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परीक्षा फॉर्म, नामांकन और अन्य जरूरी दस्तावेजों के काम रुकने से छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।

महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यह हड़ताल 31 अक्टूबर तक जारी रहेगी। प्रक्षेत्रीय मंत्री सुशील मंडल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को खुली चेतावनी दी है कि यदि जून महीने से काटे गए तीन महीने के बकाया वेतन का जल्द भुगतान नहीं किया गया और उनकी आठ सूत्री मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो इस आंदोलन को और व्यापक व उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर