टीएमबीयू के बहुदेशीय प्रशाल में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार शुरू, विकसित भारत @ 2047 के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर महामंथन

 


भागलपुर, 04 नवंबर (हि.स.)। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के बहुदेशीय प्रशाल में बुधवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय बहुविषयक सेमिनार का शानदार आगाज हुआ। विश्वविद्यालय के ग्रामीण अर्थशास्त्र एवं सहकारी प्रबंधन विभाग और औद्योगिक संबंध एवं कार्मिक प्रबंधन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य विषय 'विकसित भारत @ 2047 के लिए समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मानव संसाधन विकास' रखा गया है। कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 10:30 बजे मुख्य अतिथियों और शिक्षाविदों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। आयोजन समिति से जुड़े डॉ. रविशंकर चौधरी ने जानकारी दी कि इस दो दिवसीय सेमिनार में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों से नामचीन नीति निर्धारक, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और शोधार्थी शामिल हो रहे हैं। सभी विशेषज्ञ ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने और 2047 तक 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में मानव संसाधन की सही भूमिका पर अपने-अपने शोध पत्र और महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत कर रहे हैं। दो दिनों तक चलने वाले इस महामंथन में कई तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और आर्थिक समानता को बढ़ावा देना, ग्रामीण युवाओं के कौशल को निखारकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार करना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को मजबूत करना, सहकारी समितियों को मजबूत करना और छोटे-छोटे ग्रामीण उद्योगों (स्टार्टअप्स) को बढ़ावा देना और पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाए बिना टिकाऊ आर्थिक मॉडल तैयार करना आदि विषयों पर चर्चा की जाएगी। इस सेमिनार में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिभागियों द्वारा पढ़े जा रहे शोध पत्र ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सरकार और नीति निर्धारकों के लिए एक नया रोडमैप तैयार करने में सहायक सिद्ध होंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन और आयोजन समिति के अनुसार, गहन विमर्श के बाद इस राष्ट्रीय सेमिनार का औपचारिक समापन कल, 5 नवंबर को होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर