भागलपुर में मिला करोड़ों साल पुराने वृक्ष जीवाश्मों की होगी वैज्ञानिक जांच, लखनऊ भेजा गया नमूना

 


भागलपुर, 08 जुलाई (हि.स.)। भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड क्षेत्र से मिले दो अति प्राचीन वृक्ष जीवाश्मों (ट्री फॉसिल) की अब वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी।

इन जीवाश्मों की वास्तविक उम्र, प्रजाति और भूवैज्ञानिक महत्व का पता लगाने के लिए जिला प्रशासन ने लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित संस्थान बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज से संपर्क किया है।

प्रशासन के निर्देश पर दोनों जीवाश्मों को सुरक्षित रूप से भागलपुर संग्रहालय में संरक्षित कर दिया गया है। वैज्ञानिक परीक्षण के लिए इन्हें लखनऊ भेजा गया है। जहां विशेषज्ञ इनके संरक्षण, उम्र, प्रजाति और उस समय की पर्यावरणीय परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

बताया जा रहा है कि इन जीवाश्मों के अध्ययन से भागलपुर और आसपास के क्षेत्र के प्राचीन प्राकृतिक इतिहास, वनस्पतियों और भूवैज्ञानिक संरचना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

गौरतलब है कि इन जीवाश्मों की पहचान सबसे पहले सैंडिस कंपाउंड में मॉर्निंग वॉक के दौरान हुई थी। तस्वीरें विशेषज्ञों को भेजने के बाद इसे संभावित वृक्ष जीवाश्म माना गया। जिसके बाद जिला प्रशासन ने वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी।

फिलहाल सभी की नजर वैज्ञानिकों की रिपोर्ट पर टिकी है जो यह बताएगी कि भागलपुर में मिले ये जीवाश्म आखिर कितने प्राचीन हैं और इनका ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व कितना बड़ा है।

हालांकि इसको लेकर जिला कला एवं सांख्यिकी पदाधिकारी अंकित रंजन ने बताया कि यह जीवाश्म किसी पेड़ का है और यह लगभग देखने से ऐसा प्रतीक हो रहा है कि लाखों वर्ष पुराना पेड़ है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर