वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष्य की वादियां और पहाडियों को देखने लंदन और मोतिहारी से पहुंचे पर्यटक

 






पश्चिम चम्पारण (बगहा),16 अगस्त (हि.स.)।वाल्मीकिनगर का पर्यटन सत्र भले ही समाप्त हो गया हो और वाल्मीकिनगर की वादियों में पर्यटकों की चहल-पहल कुछ कम हो गई हो, लेकिन यहां की प्राकृतिक खूबसूरती का आकर्षण अब भी बरकरार है।

यही वजह है कि लंदन से लेकर मोतिहारी तक के पर्यटक वाल्मीकि व्याघ्र आरक्ष्य की हसीन वादियां और पहाडियों की मनमोहक प्रकृति को करीब से निहारने यहां पहुंच रहे हैं। लंदन और मोतिहारी से आए पर्यटकों के एक समूह ने शनिवार और रविवार को वाल्मीकिनगर का भ्रमण कर जल, जंगल और पहाड़ के अद्भुत संगम का आनंद लिया।

लंदन के आईटी सेक्टर में कार्यरत अभिजीत कुमार और निधि अपने परिजनों के साथ वाल्मीकिनगर पहुंचे। उनके साथ मोतिहारी के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सौरभ कुमार गौतम, उनकी पत्नी डॉ. अलका, अद्वैत, कुहू, वेदांत, अतुल कुमार, निशु कुमारी और वेदु भी शामिल रहे। एक दिवसीय प्रवास के दौरान पूरे परिवार ने वाल्मीकिनगर के प्राकृतिक एवं धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया।डाॅ.सौरभ ने बताया कि वाल्मीकिनगर और वीटीआर के पर्यटन स्थलों के बारे में हम सब ने गूगल के माध्यम से जानकारी जुटाई थी। इंटरनेट पर यहां की प्राकृतिक खूबसूरती और पर्यटन स्थलों की तस्वीरों ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि परिवार के साथ वाल्मीकिनगर आने की योजना बना ली।

वाल्मीकिनगर पहुंचने के बाद हम सब ने वन विभाग के जंगल कैंप का भ्रमण किया। घने जंगल, पहाड़, नदी और हरियाली के बीच कुछ समय बिताकर उन्होंने प्रकृति के करीब होने का अनुभव किया। इसके बाद पर्यटक वाल्मीकि आश्रम पहुंचे और वहां पूजा-अर्चना कर माथा टेका। जटाशंकर मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा की। प्राकृतिक सौंदर्य के साथ धार्मिक आस्था का यह संगम उनके लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

उम्मीद से कहीं अधिक खूबसूरत है वाल्मीकिनगर

मोतिहारी के चिकित्सक डॉ. सौरभ कुमार गौतम ने वाल्मीकिनगर की खूबसूरती की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां का शांत वातावरण, चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ और जंगल मन को सहज ही आकर्षित करते हैं। उन्होंने कहा कि वाल्मीकिनगर जैसी प्राकृतिक संपदा के बीच रहने वाले लोग वास्तव में सौभाग्यशाली हैं।

डॉ. गौतम के अनुसार, जिस खूबसूरती की उम्मीद लेकर वे यहां पहुंचे थे, वाल्मीकिनगर उससे कहीं अधिक मनमोहक निकला। प्रकृति की गोद में बिताया गया समय पूरे परिवार के लिए यादगार रहा।

जंगल सफारी के लिए फिर आयेगा परिवार

पर्यटन सत्र समाप्त होने के कारण परिवार इस बार वीटीआर में जंगल सफारी का आनंद नहीं ले सका। डॉ. गौतम ने बताया कि अब करीब दो माह बाद वे फिर वाल्मीकिनगर आयेंगे। इस बार उनका उद्देश्य जंगल सफारी के माध्यम से वीटीआर के वन्यजीवों और जंगल की प्राकृतिक दुनिया को करीब से देखना होगा।

लंदन से आए पर्यटकों का वाल्मीकिनगर पहुंचना इस बात का संकेत है कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से वीटीआर की प्राकृतिक खूबसूरती की पहुंच अब देश की सीमाओं से बाहर तक हो रही है। यदि पर्यटन सुविधाओं का और विस्तार किया जाय, तो वाल्मीकिनगर देश-विदेश के पर्यटकों के लिए और भी आकर्षक पर्यटन केंद्र बन सकता है।

जल, जंगल, पहाड़, नदी और धार्मिक आस्था—इन सबका अनूठा संगम वाल्मीकिनगर को बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अलग पहचान देता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द नाथ तिवारी