नालंदा जिले में पाण्डुलिपियों का संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन के लिए जिला स्तर पर किया गया कमिटी का गठन
नालंदा, बिहारशरीफ 11 अप्रैल (हि.स.)।
जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय सभागार में आज शनिवार को “ज्ञान भारतम् मिशन” के अंतर्गत पाण्डुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा हमारी अमूल्य धरोहर है, जो कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र एवं कपड़े आदि पर हस्तलिखित पाण्डुलिपियों के रूप में सुरक्षित है। इन पाण्डुलिपियों का संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन कर उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।इसके लिए जिला स्तर पर कमिटी का गठन किया गया है।उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में “ज्ञान भारतम् मिशन” की शुरुआत की गई है, जिसके अंतर्गत देशभर में उपलब्ध पाण्डुलिपियों का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटाइजेशन एवं अभिलेखीकरण किया जा रहा है, ताकि यह ज्ञान शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों के लिए सुलभ हो सके।जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभाग के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, मठ-मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक पुस्तकालयों तथा निजी व्यक्तियों के पास उपलब्ध पाण्डुलिपियों की पहचान, सूचीकरण एवं डिजिटाइजेशन कार्य को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से पूरा करें।उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान के अंतर्गत पाण्डुलिपियों को “ज्ञान भारतम् पोर्टल” पर अपलोड कर वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाएगा। यह पहल “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य के अनुरूप डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण को भी सशक्त बनाएगी।उन्होंने यह भी बताया कि कोई भी व्यक्ति “ज्ञान भारतम्” ऐप/पोर्टल के माध्यम से अपनी पाण्डुलिपि स्वयं अपलोड कर सकता है, जिससे यह अमूल्य धरोहर सुरक्षित होने के साथ-साथ आम नागरिकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो सकेगी।इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, नगर आयुक्त, अपर समाहर्ता,जिला पंचायत राज पदाधिकारी, सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी,एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रमोद पांडे