सुपौल व्यवहार न्यायालय में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

 




सुपौल, 09 मई (हि.स.)। व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर आयोजित इस लोक अदालत का विधिवत उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत कुमार सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अफजल आलम, जिलाधिकारी सावन कुमार तथा पुलिस अधीक्षक शरथ आर एस ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर न्यायिक पदाधिकारी राहुल उपाध्याय, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रामचंद्र प्रसाद, प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के दंडाधिकारी सहित न्यायालय के कई अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन को लेकर सुबह से ही न्यायालय परिसर में लोगों की भारी भीड़ देखी गई। जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए लोग अपने पुराने एवं लंबित मामलों के निष्पादन के लिए न्यायालय पहुंचे। लोक अदालत में सुलहनीय आपराधिक मामले, बैंक ऋण विवाद, बिजली बिल विवाद, पारिवारिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावा, श्रम विवाद, भूमि विवाद तथा ट्रैफिक चालान से संबंधित मामलों की सुनवाई एवं निष्पादन किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह ने कहा कि लोक अदालत न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है, जहां आपसी समझौते और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मामलों का त्वरित निष्पादन किया जाता है। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को वर्षों तक कोर्ट के चक्कर लगाने से राहत मिलती है और कम समय में न्याय प्राप्त होता है। उन्होंने आम लोगों से लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अफजल आलम ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को सुलभ, सरल और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में मामलों का निष्पादन आपसी सहमति से किया जाता है, जिससे दोनों पक्षों के बीच सौहार्द बना रहता है। साथ ही लोक अदालत में दिए गए फैसले को अंतिम माना जाता है और इसके खिलाफ किसी प्रकार की अपील का प्रावधान नहीं होता।

इस अवसर पर जिलाधिकारी सावन कुमार ने कहा कि लोक अदालत आम नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी मंच है। यहां कम से कम खर्च में और बिना अधिक कानूनी जटिलताओं के मामलों का समाधान संभव है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिनके भी मामले लंबित हैं, वे लोक अदालत के माध्यम से उनका निष्पादन कराएं। जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार एवं न्यायपालिका का उद्देश्य आम लोगों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है और लोक अदालत इस दिशा में एक प्रभावी पहल है।

जिलाधिकारी ने विशेष रूप से ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में ट्रैफिक चालान पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर पुराने ट्रैफिक चालान लंबित हैं, वे इस अवसर का लाभ उठाकर अपने मामलों का निष्पादन करा सकते हैं।

लोक अदालत में बड़ी संख्या में मामलों का निष्पादन आपसी समझौते के आधार पर किया गया। कई लोगों ने वर्षों से लंबित मामलों का समाधान होने पर संतोष व्यक्त किया। लोगों ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से कम समय में मामले का समाधान होना बेहद राहत देने वाला अनुभव है।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र