लौकहा में धर्मराज सभा का आयोजन, धर्मराज महोत्सव को राजकीय दर्जा देने की मांग
सुपौल, 31 मार्च (हि.स.)। सदर प्रखंड के लौकहा पंचायत में अखिल भारतीय लोकगाथा भगैत महासभा के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राज्यस्तरीय भगैत महासम्मेलन के समापन अवसर पर मंगलवार को धर्मराज सभा का आयोजन किया गया।
सभा में सर्वसम्मति से लोकगाथा भगैत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को भारत सरकार द्वारा भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की मांग की गई। इसके साथ ही बिहार सरकार से धर्मराज महोत्सव को राजकीय महोत्सव का दर्जा देने की भी मांग उठाई गई।
धर्मराज सभा की अध्यक्षता करते हुए भगैत महासभा के संयोजक सह प्रवक्ता डॉ. अमन कुमार ने कहा कि लोकगाथा भगैत हमारी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दस्तावेज है और यह भारतीय संस्कृति की आत्मा है। उन्होंने कहा कि भगैत जीवन के नैतिक मूल्यों, नि:स्वार्थ प्रेम, साहस, दया, करुणा, सब्र, कर्तव्य, भाईचारा और एकजुटता की सीख देती है।
उन्होंने कहा कि भगैत सभी धर्मों के सर्वश्रेष्ठ विचारों का अद्भुत संगम है और यह मानवता की असली पाठशाला है, जहां धर्म, कर्म, कर्तव्य और प्रेम का पाठ पढ़ाया जाता है। डॉ. कुमार ने कहा कि दाता धर्मराज की कथा सम्पूर्ण मानव जाति के लिए प्रेरणादायक है और मानवता ही सर्वोत्तम धर्म है।
यज्ञशाला मंत्री गजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि समाज में आपसी संबंध सुदामा और भगवान श्रीकृष्ण जैसे होने चाहिए, जहां एक ने कुछ मांगा नहीं और दूसरे ने सब कुछ देकर भी कभी उसका एहसास नहीं कराया।
वहीं वार्षिक सभापति घिनाय यादव ने कहा कि आध्यात्म का मार्ग ज्ञानियों का मार्ग है और इसे अपनाने की आवश्यकता है। वार्षिक उपसभापति अनंत प्रसाद यादव और कोषाध्यक्ष रघुनंदन प्रसाद यादव ने कहा कि भगैत भारतीय संस्कृति और सभ्यता की सर्वोत्तम प्रहरी है तथा भगैत का श्रवण करने से मानव का कल्याण होता है।
धर्मराज सभा में महासभा कोषाध्यक्ष लक्ष्मी यादव, परमेश्वरी यादव, मासिक सभापति महेश्वरी यादव, यदुनंदन यादव, शिवन यादव, अच्छेलाल यादव, रामचंद्र यादव, चंदेश्वरी यादव, गंगा बाबू, उमेश मेहता, छूतहरु भगत, खट्टर यादव और अधिवक्ता नरेंद्र कुमार यादव सहित कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र