रास्ता के विवाद में घायल मजदूर की मौत, नेपाल अस्पताल में बिल के कारण दो दिन फंसा रहा शव

 


सुपौल, 01 अप्रैल (हि.स.)। बिहार में सुपौल जिले के जदिया थाना क्षेत्र में रास्ते के विवाद ने एक परिवार की जिंदगी को गहरे संकट में डाल दिया। इस विवाद में गंभीर रूप से घायल युवक की सोमवार को नेपाल के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।

मृतक का शव अस्पताल प्रशासन द्वारा बिल भुगतान के बिना देने से इनकार कर दिया गया, जिसके कारण शव दो दिनों तक अस्पताल में ही पड़ा रहा। मंगलवार को गांव के लोगों ने मानवीय पहल करते हुए हिंदू-मुस्लिम समाज के सहयोग से चंदा इकट्ठा किया। ग्रामीणों ने मिलकर करीब पांच लाख रुपये जुटाए, जिसके बाद अस्पताल का बिल चुकाया गया और शव को गांव लाया जा सका।

घटना जदिया थाना क्षेत्र के मानगंज पश्चिम पंचायत के वार्ड संख्या-5 की है। मृतक की पहचान मो इजराइल के रूप में हुई है। बताया जाता है कि वह मजदूरी कर हर महीने करीब 10 से 15 हजार रुपये कमाता था और उसी आय से पूरे परिवार का भरण-पोषण करता था। उसकी मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है, क्योंकि अब घर में कमाने वाला कोई सदस्य नहीं बचा है।

मृतक अपने पीछे पांच बच्चों को छोड़ गया है, जिनमें एक बेटा और चार बेटियां शामिल हैं। बेटा दृष्टिहीन है और इस कारण वह काम करने में असमर्थ है। परिवार की एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि तीन बेटियां अभी नाबालिग और अविवाहित हैं। पहले से ही कमजोर आर्थिक स्थिति वाले इस परिवार के सामने अब जीवनयापन की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

घटना की शुरुआत 27 मार्च को रास्ते को लेकर हुए विवाद से हुई थी। उस दिन ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया था। लेकिन 28 मार्च की शाम को एक पक्ष के लोग हथियार और लाठी-डंडे लेकर पहुंचे और दूसरे पक्ष पर हमला कर दिया। इस हमले में कई लोग घायल हुए, जिनमें मो. इजराइल को सिर में गंभीर चोट लगी थी।घायल अवस्था में उन्हें बेहतर इलाज के लिए नेपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सोमवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

इधर, जदिया थानाध्यक्ष ने बताया कि दोनों पक्षों के बयान के आधार पर अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। इस घटना ने एक ओर जहां गांव में शोक का माहौल बना दिया है, वहीं मानवता की मिसाल भी पेश की है, जब गांव के लोगों ने धर्म से ऊपर उठकर चंदा जुटाया और मृतक के शव को उसके घर तक पहुंचाने में मदद की।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र