सुपौल में 100 दिवसीय ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
सुपौल, 23 फ़रवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार, नई दिल्ली के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार सुपौल द्वारा 100 दिवसीय ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत सोमवार, 23 फरवरी को आशा स्कीम अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम गांधी मैदान सुपौल में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को बताया गया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (1 नवंबर 2007 से प्रभावी) के अनुसार भारत में लड़की की आयु 18 वर्ष से कम और लड़के की आयु 21 वर्ष से कम होने पर किया गया विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है, जो एक दंडनीय अपराध है।
कानून के तहत बाल विवाह करने, करवाने या उसमें भाग लेने एवं प्रोत्साहित करने वालों (माता-पिता, पंडित, बाराती आदि) को 2 वर्ष तक का कठोर कारावास एवं 1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। साथ ही जानकारी दी गई कि बाल विवाह को बालिग होने के दो वर्ष के भीतर (अधिकतम 20 वर्ष की आयु तक) अदालत में याचिका दायर कर निरस्त कराया जा सकता है। बाल विवाह की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा ‘बाल विवाह निषेध अधिकारी’ नियुक्त किए जाते हैं। किसी भी बाल विवाह की सूचना 1098, 181, 122 या 15100 हेल्पलाइन नंबर पर दी जा सकती है। कार्यक्रम में अधिवक्ता बृजभूषण नवीन एवं पराविधिक स्वयंसेवक मो. निजाम, मो. मोअज्जम तथा मिथिलेश कुमार चौधरी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र