सुपौल में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ को बड़ी सफलता, 100 साल पुरानी कबीर पांडुलिपि मिली

 






सुपौल, 01 मई (हि.स.)। जिले में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। छातापुर प्रखंड के हरिहरपुर स्थित सदगुरु कबीर मठ से 100 वर्ष से अधिक पुरानी एक दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि बरामद की गई है, जिससे जिले की सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम मिला है।

‘ज्ञान विवेक’ नाम से प्राप्त यह पांडुलिपि मठ के महात्मा द्वारा हस्तलिखित बताई जा रही है, जो वर्तमान मठाधीश हरि शरण गोस्वामी के संरक्षण में सुरक्षित थी। देवनागरी लिपि में लिखी गई इस पांडुलिपि में संत कबीर के दोहे और चौपाइयों का संग्रह है। इसकी साफ-सुथरी लिखावट और स्पष्ट अक्षर इसे और भी खास बनाते हैं।

जिला पदाधिकारी सावन कुमार ने इस उपलब्धि को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसी पांडुलिपियां हमारी सभ्यता और ज्ञान की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी तारकेश्वर पटेल ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ का उद्देश्य न सिर्फ प्राचीन ग्रंथों का संरक्षण करना है, बल्कि सुपौल को एक सांस्कृतिक ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करना भी है।

प्रशासन की ओर से इन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और सुरक्षित संरक्षण की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। वहीं, स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए सहयोग का भरोसा दिया है।

जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि उनके पास यदि कोई पुरानी पांडुलिपि या ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद हो, तो उसे इस अभियान के साथ साझा करें, ताकि उन्हें संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके।

हरिहरपुर कबीर मठ से मिली यह पांडुलिपि इस बात का संकेत है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी ज्ञान और इतिहास का अनमोल खजाना छिपा हुआ है, जिसे खोजकर संरक्षित करने की जरूरत है।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र