विद्यार्थियों को नवाचार और स्टार्टअप का गुर सिखाया, प्रोटोटाइप बिजनेस मॉडल विकसित करने पर कार्यशाला
सुपौल, 14 अक्टूबर (हि.स.)। विद्यार्थियों में नवाचार, उद्यमिता और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सुपौल अभियंत्रण महाविद्यालय की ओर से पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, सुपौल में प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट एवं प्रोटोटाइप बिजनेस मॉडल विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, इनोवेशन सेल (एमआईसी) तथा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के मार्गदर्शन में संचालित डेवलपिंग इनोवेशन कल्चर एंड एंटरप्रेन्योरशिप (डाइस) पहल के तहत आयोजित यह तीसरी गतिविधि थी। इसमें विद्यार्थियों को अपने अभिनव विचारों को व्यावहारिक स्वरूप देने और उन्हें व्यावसायिक मॉडल में बदलने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं विषय विशेषज्ञ के रूप में सुपौल अभियंत्रण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अच्युतानंद मिश्रा उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि किसी नए विचार को तकनीकी और व्यावहारिक रूप देकर प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (पीओसी) तथा कार्यशील प्रोटोटाइप में कैसे बदला जा सकता है। उन्होंने बिजनेस मॉडल तैयार करने की प्रक्रिया, लागत का आकलन, उत्पाद की उपयोगिता और बाजार में उसकी व्यवहार्यता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि किसी विचार की वास्तविक सफलता तभी है, जब वह समाज की किसी समस्या का समाधान करने में सक्षम हो और उसे टिकाऊ बिजनेस मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं को पहचानने, नए समाधान खोजने और उन समाधानों को प्रयोग के माध्यम से परखने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने अपने अभिनव विचारों को बिजनेस मॉडल में बदलने से संबंधित कई सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने उनके सवालों का जवाब देते हुए प्रोटोटाइप निर्माण और उसके व्यावहारिक उपयोग की बारीकियों को समझाया। इस गतिविधि को लेकर छात्र-छात्राओं में उत्साह देखा गया।
डाइस के सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट (एसपीओसी) सह सुपौल अभियंत्रण महाविद्यालय के डीन एकेडमिक्स डॉ. चंदन कुमार ने कहा कि योजना के तहत आयोजित पिछली दो गतिविधियों में उद्यमिता कौशल कार्यशाला और प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीडब्ल्यूएमयू) एवं इंजीनियरिंग लैब का फील्ड विजिट शामिल था। इन गतिविधियों से विद्यार्थियों को नए विचार विकसित करने और तकनीकी कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिला। तीसरी गतिविधि का उद्देश्य उन विचारों को प्रोटोटाइप के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि सुपौल अभियंत्रण महाविद्यालय विद्यार्थियों के अभिनव विचारों को पेटेंट और स्टार्टअप मॉडल तक पहुंचाने के लिए निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा। पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय की प्राचार्या मीना मुर्मू ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के तकनीकी मार्गदर्शन सत्रों से स्कूली विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक क्षमता और व्यावसायिक सोच विकसित होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विद्यार्थी इस प्रशिक्षण का लाभ उठाकर भविष्य में बेहतर प्रोटोटाइप और नवोन्मेषी बिजनेस मॉडल तैयार करेंगे। कार्यक्रम का संचालन एवं पर्यवेक्षण विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. उमाशंकर, अजीत कुमार झा और अन्य शिक्षकों की उपस्थिति में किया गया। कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को नवाचार के व्यावहारिक पक्षों को समझने तथा अपने विचारों को उपयोगी उत्पाद और उद्यम में बदलने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र