45वीं वाहिनी एसएसबी में स्नेक रेस्क्यू और वन्यजीव संरक्षण पर जागरूकता कार्यक्रम
सुपौल, 06 अक्टूबर (हि.स.)। वन्यजीव संरक्षण एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से मंगलवार को 45वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल मुख्यालय, वीरपुर परिसर में वन्य प्राणी सप्ताह के अंतर्गत स्नेक रेस्क्यू, राहत-बचाव एवं वन्यजीव संरक्षण विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन 45वीं वाहिनी के कमांडेंट गौरव सिंह के निर्देशन में किया गया।
वन प्रमंडल, सुपौल की ओर से 02 अक्टूबर से 08 अक्टूबर तक मनाए जा रहे वन्य प्राणी सप्ताह के तहत आयोजित कार्यक्रम में वन विभाग के प्रशिक्षकों ने अधिकारियों एवं जवानों को सांपों तथा अन्य वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रजातियों के सांपों की पहचान, उनके व्यवहार तथा सांप दिखाई देने की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया गया। प्रशिक्षकों ने सुरक्षित स्नेक रेस्क्यू की प्रक्रिया और सर्पदंश की स्थिति में तत्काल अपनाए जाने वाले आवश्यक प्राथमिक उपायों की भी जानकारी दी।
वन विभाग के विशेषज्ञों ने बताया कि सांपों को देखकर घबराने या उन्हें मारने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखना चाहिए तथा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की सहायता से उनका सुरक्षित रेस्क्यू कर प्राकृतिक आवास में छोड़ना चाहिए। इससे मानव जीवन की सुरक्षा के साथ-साथ जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को भी बनाए रखने में मदद मिलती है। वाहिनी मुख्यालय स्थित यूनिट हॉस्पिटल के सहायक कमांडेंट (मेडिकल) जीडी (एमओ) डॉ. विभूति प्रियदर्शी ने सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक चिकित्सा, आवश्यक सावधानियों और चिकित्सकीय उपचार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
उन्होंने सर्पदंश के मामलों में समय पर चिकित्सकीय सहायता लेने तथा आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया अपनाने के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में द्वितीय कमान अधिकारी जगदीश कुमार शर्मा, उप कमांडेंट प्रवीण कुमार कौशिक, सहायक कमांडेंट जितेंद्र झा, वन विभाग के रेंज ऑफिसर विजय प्रताप विक्रम सहित 45वीं वाहिनी के अधिकारी एवं जवान तथा बिहार पुलिस के प्रशिक्षणाधीन कार्मिक शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को स्नेक रेस्क्यू एवं राहत-बचाव से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि मानव जीवन की सुरक्षा के साथ वन्यजीवों का संरक्षण भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों से सुरक्षा बलों एवं अन्य कार्मिकों को आपात स्थिति में सुरक्षित एवं प्रभावी तरीके से स्नेक रेस्क्यू और राहत-बचाव कार्य करने में मदद मिलेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र