ग्रामीण विकास के लिए बनने वाली योजनाओं में गरीब का विशेष ख्याल रखा जाए : श्रवण कुमार

 


पटना, 03 जुलाई (हि.स.)। बिहार सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित करने, किसानों और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा गांवों की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में नई पहल करने जा रही है। इसी उद्देश्य से शुक्रवार को ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और विभागीय अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं, हाट-बाजारों के विकास और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि ग्रामीण विकास विभाग की सभी योजनाओं का केंद्र बिंदु गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों की आजीविका तथा रोजगार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में यह सुनिश्चित किया जाए कि ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और किसानों को अधिक से अधिक रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हों।

मंत्री श्रवण कुमार ने नाबार्ड के अधिकारियों से ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित योजनाओं तथा हाट-बाजारों के निर्माण में संभावित सहयोग की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त हाट विकसित किए जाएं, ताकि जीविका समूहों, किसानों और ग्रामीण कारीगरों के उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सके।

मंत्री ने कहा कि पर्यटन स्थलों पर आधुनिक हाट बनने से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। इससे ग्रामीण उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी, किसानों और स्वयं सहायता समूहों की आय में वृद्धि होगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

ग्रामीण विकास मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि जीविका दीदियों तथा अन्य जरूरतमंद लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली योजनाओं का चयन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कराया जाए और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ एजेंसियों की सेवाएं ली जाएं। उन्होंने कहा कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका लाभ सीधे ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे और उनकी आय बढ़ाने में मददगार साबित हों।

बैठक में मंत्री ने ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जीविका दीदियों और अन्य इच्छुक युवाओं को प्लंबर सहित विभिन्न तकनीकी ट्रेडों का प्रशिक्षण देने की योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित प्लंबरों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं भी सुलभ होंगी और युवाओं को आजीविका का स्थायी साधन मिलेगा।

मंत्री श्रवण कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने और लंबे समय से खाली पड़े सरकारी भवनों की पहचान कर उनका उपयोग हाट, बाजार और सामुदायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदानों का सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए, ताकि युवाओं को खेल सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और गांवों में सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले।

बैठक में मंत्री ने कहा कि जीविका दीदियों के कौशल विकास के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएं, ताकि वे गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर सकें और उनके उत्पादों की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी मार्केटिंग हो सके। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक प्रखंड में कम से कम 10 महिलाओं एवं युवतियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। ये प्रशिक्षित महिलाएं न केवल स्वयं बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करेंगी, बल्कि अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

बैठक में नाबार्ड और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के बीच विभिन्न योजनाओं के वित्तीय एवं तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि नाबार्ड के सहयोग से ऐसी योजनाएं तैयार की जाएं, जिनसे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ें, स्थानीय उत्पादों को बाजार मिले और गांवों की अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर बन सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रस्तावों पर शीघ्र कार्रवाई करते हुए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी