कच्ची कांवड़िया पथ पर बिखरे आस्था के रंग, पश्चिम बंगाल के श्रद्धालुओं का अनोखा संदेश

 


भागलपुर, 22 अगस्त (हि.स.)। सावन के पवित्र महीने में सुल्तानगंज का नमामि गंगे घाट आस्था के सागर में डूबा हुआ है। देश के कोने-कोने से आ रहे शिव भक्तों के जयकारों से पूरा माहौल शिवमय हो गया है। इसी बीच, सुल्तानगंज से देवघर को जोड़ने वाले कच्ची कांवड़िया पथ पर श्रद्धालुओं का उत्साह और उनकी अनोखी कांवड़ हर किसी के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कच्ची कांवड़िया पथ पर इस बार पश्चिम बंगाल से आए शिव भक्तों का एक जत्था हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। इन श्रद्धालुओं ने बाबा भोलेनाथ और माता पार्वती की बेहद खूबसूरत और भव्य मूर्तियां बनाई हैं, जिन्हें उन्होंने कांवड़ का रूप दिया है। इस अनोखे और भारी-भरकम कांवड़ को कंधे पर उठाए श्रद्धालु 'बोल बम' और 'हर हर महादेव' के जयकारे लगाते हुए देवघर की ओर बढ़ रहे हैं। इस कांवड़ की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण-अनुकूल होना है।

श्रद्धालुओं ने बताया कि इसे पूरी तरह प्रकृति को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कांवड़ और मूर्तियों को सजाने व रंगने के लिए केवल इको-फ्रेंडली रंगों का इस्तेमाल किया गया है, ताकि इससे पर्यावरण या जल स्रोतों को कोई नुकसान न पहुंचे। रास्ते से गुजरने वाला हर कांवड़िया और स्थानीय नागरिक इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए रुक रहा है। पश्चिम बंगाल के इन शिव भक्तों की श्रद्धा, उनका कठिन पैदल सफर और पर्यावरण के प्रति उनकी यह अनूठी सोच रास्ते में कौतूहल और प्रेरणा का विषय बनी हुई है। गंगा घाट से लेकर कांवड़िया पथ तक, आस्था के इस भव्य रूप को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर