शिक्षक स्थानांतरण का चरणबद्ध शेड्यूल भ्रामक, सामान्य तबादले से हो समाधान : डॉ. सत्येंद्र ओझा

 


बक्सर , 18 जुलाई (हि.स.)। बिहार सरकार के द्वारा राज्य के शिक्षकों के बहुप्रतीक्षित स्थानांतरण को लेकर जैसे ही अधिसूचना जारी की गई है वैसे ही इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है ।

बता दे कि शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार जो बातें सामने आई है उसमें बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली, 2026 के तहत पूरी प्रक्रिया तीन चरणों में संपन्न होगी। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल 29 जुलाई से खोला जाएगा और शिक्षक 5 अगस्त तक आवेदन कर सकेंगे।

बताया गया है कि पहले चरण में समायोजन एवं समानुपातीकरण, दूसरे चरण में जिला, प्रमंडल और राज्य स्तर पर पारस्परिक (म्यूचुअल) स्थानांतरण तथा तीसरे चरण में सामान्य स्थानांतरण किया जाएगा। सरकार के अनुसार 16 सितंबर को रिक्त पदों की संशोधित सूची जारी होगी। इसके बाद 17 से 23 सितंबर तक शिक्षक अपनी वरीयता के अनुसार विद्यालयों का चयन कर आवेदन करेंगे। अंतिम स्थानांतरण सूची का प्रकाशन, अपील और निपटान की प्रक्रिया 24 सितंबर से 31 अक्टूबर के बीच पूरी की जाएगी। वही सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से स्थानांतरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी।

विपक्ष ने लगाया सीधा आरोप

वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. सत्येंद्र ओझा ने बिहार सरकार द्वारा जारी शिक्षक स्थानांतरण शेड्यूल को भ्रामक और अव्यावहारिक बताते हुए इसकी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण की समस्या का समाधान चरणबद्ध प्रक्रिया से नहीं, बल्कि एक साथ सामान्य स्थानांतरण के लिए आवेदन लेकर किया जाना चाहिए।

ओझा ने कहा कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री पहले ही पुरुष शिक्षकों को निकटवर्ती प्रखंड तथा महिला शिक्षकों को निकटवर्ती पंचायत में स्थानांतरण देने की बात कह चुके हैं, ऐसे में अलग-अलग चरणों की आवश्यकता नहीं है। उनका आरोप है कि मौजूदा प्रक्रिया से म्युचुअल ट्रांसफर, समायोजन और रेशनलाइजेशन के नाम पर शिक्षकों का आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण होने की आशंका बढ़ेगी। उन्होंने सरकार से एकल स्थानांतरण शेड्यूल जारी कर शिक्षकों की सुविधा के अनुरूप विद्यालयों में पदस्थापन सुनिश्चित करने की मांग की।

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हिन्दुस्थान समाचार / Jitendra Mishra