राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और इतिहास, चुनौतियां अवसर और समाधान विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

 


भागलपुर, 05 अगस्त (हि.स.)। विश्वविद्यालय इतिहास विभाग एवं प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को विश्वविद्यालय इतिहास विभाग में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और इतिहास, चुनौतियां अवसर और समाधान विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय इतिहास विभाग की विभागाध्यक्षा प्रोफेसर अर्चना कुमारी साह ने किया।

संगोष्ठी में विश्वविद्यालय प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर के. के. मंडल इतिहास विभाग के डॉक्टर राजशेखर, डॉक्टर मल्लिका मंजरी, डॉक्टर राधिका मिश्रा, डॉक्टर अंशुमान सुमन तथा प्राचीन इतिहास विभाग के डॉक्टर पवन शेखर तथा डॉ. उमेश तिवारी के साथ काफी संख्या में दोनों विभागों के शोधार्थी एवं छात्रगण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विषय प्रवेश करते हुए डॉक्टर मल्लिका मंजरी ने नई शिक्षा नीति के आलोक में पी. जी. पाठ्यक्रम की रूपरेखा और उसके क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाइयों और उसके निदान पर चर्चा की। प्रोफेसर के. के. मंडल ने नई शिक्षा नीति के विभिन्न प्रावधानों की चर्चा करते हुए इसके आलोक में इतिहास विषय के लिए निर्मित पाठ्यक्रम में इतिहास लेखन के सभी धाराओं एवं विभिन्न भागों के संतुलन की कमी की ओर ध्यान दिलाते हुए उसमें सुधार की आवश्यकता बताई।

डॉ राधिका मिश्रा ने उच्च शिक्षा में आलोचनात्मक दृष्टि के विकास की आवश्यकता बताते हुए नई शिक्षा नीति में इसके समन्वय पर जोर दिया।

डॉक्टर पवन शेखर ने नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना और तकनीकी प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई। डॉ. उमेश तिवारी ने कौशल विकास हेतु छात्रों को विषय से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। डॉक्टर अंशुमान सुमन ने सभी छात्रों तक आधुनिक तकनीक एवं उपकरणों के ज्ञान का परिचय बढ़ाने की आवश्यकता बताई। अध्यक्षीय भाषण में विभागाध्यक्ष प्रो. अर्चना कुमारी साह ने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत इतिहास विषय के उच्च शिक्षा के पठन-पाठन एवं पाठ्यक्रम में हुए बदलावों की चर्चा की। उन्होंने नई शिक्षा नीति में शामिल किए गए अनेक अवसरों का लाभ उठाने की बात करते हुए कम संसाधनों एवं आवश्यक आधारभूत संरचनाओं की कमी के बावजूद सम्मिलित प्रयास द्वारा उसके लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए टीमवर्क की भावना से काम करने पर जोर दिया। उन्होंने संगोष्ठी में आए सभी शिक्षकों एवं छात्रों को धन्यवाद दिया तथा छात्रगणों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर