महावीर जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी आयोजित
भागलपुर, 31 मार्च (हि.स.)। भागलपुर के गांधी शांति प्रतिष्ठान के सभागार में मंगलवार को प्रकाश चंद गुप्ता की अध्यक्षता एवं डॉ सुनील अग्रवाल के संचालन में जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी आयोजित किया गया।
सर्वप्रथम गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के उपाध्यक्ष मोहम्मद एनुअल हुदा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि आज के युद्ध विभिषिका में पूरी दुनिया में भगवान महावीर के संदेशों का बड़ा महत्व है। शहर के वरिष्ठ समाजसेवी रामशरण ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यटन के लिहाज से स्थानीय महावीर मंदिर जैनियों के लिए प्रमुखता से उभरकर सामने नहीं आ पाया है। इसके लिए सरकार एवं स्थानीय प्रबुद्ध जनों को ध्यान देना अति आवश्यक है।
परिवार विकास संस्था के प्रमुख जमुई से आए हुए आनंद ने आधुनिक दुनिया की वातावरण से संबंधित आदमी नामक कविता पाठ कर मनुष्यता का संदेश दिया। जैन धर्म के अनुयाई उज्जैन कुमार जैन ने बताया कि जैन धर्म रुलिंगिता से दूर रहते हैं तथा प्रकृति नियमानुकूल जीवन व्यतीत करने को प्रधानता देते हैं। जयंती की सार्थकता तभी है जब हम महावीर जी के उपदेशों के अनुसार चले। गांधी विचार विभाग के प्रोफेसर डॉ उमेश प्रसाद नीरज ने जैन धर्म के बारे में कहा कि तीर्थंकर बसुपूज्य का जन्म एवं शिक्षास्थली भागलपुर है।
पूर्व कुलपति डॉक्टर फारूक अली ने कहा कि भगवान महावीर और भगवान बुद्ध दोनों ही प्रकृति प्रेमी थे। आज हम प्रकृति विरोधी हो गए हैं। मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ मनोज ने अपनी बात रखते हुए बताया प्रतिरोध एवं बदलाव के कारण अलग-अलग धर्म की उत्पत्ति हुई है। लोकतंत्र तभी जिंदा रहेगा जब अस्तित्व को शिकार किया जाएगा और तभी समाज में शांति और अहिंसा स्थापित हो सकती है। अंत में अध्यक्षीय भाषण देते हुए प्रकाश चंद्र गुप्ता ने बताया कि सभी धर्म को समेट कर रखने की विशेषता जैन धर्म में है।
जैन धर्म में क्षमादान की परंपरा आज तक व्याप्त है। धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर जयंत जलद ने किया। इस अवसर पर प्रो. मनोज, अनीता शर्मा, वीणा सिन्हा, पूनम देवी, मोहम्मद तकी अहमद जावेद, डॉ उमेश प्रसाद, डॉक्टर जयंत जलत, वासुदेव भाई सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर