राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के छह वर्ष पूरे होने पर गांधी विचार विभाग में संगोष्ठी
भागलपुर, 06 अगस्त (हि.स.)। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर गांधी विचार विभाग में गुरुवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के 6 वर्ष, चुनौतियां और उपलब्धियां विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें नई शिक्षा नीति के छह वर्षों की उपलब्धियों, चुनौतियों तथा भारतीय शिक्षा व्यवस्था के भविष्य पर विस्तृत चर्चा की गई।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. अमित रंजन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 विकसित भारत के निर्माण का आधार है। उन्होंने शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों से नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया तथा कहा कि शिक्षा को रोजगारोन्मुख होने के साथ-साथ संस्कारयुक्त और समाजोपयोगी भी होना चाहिए। मुख्य वक्ता के रूप में विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं गांधीवादी विचारक प्रो. (डॉ.) विजय कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान परंपरा, कौशल विकास और मूल्यपरक शिक्षा को नई दिशा देने वाली ऐतिहासिक पहल है।
उन्होंने कहा कि गांधीजी की नई तालीम, स्वावलंबन, श्रम की प्रतिष्ठा तथा नैतिक मूल्यों को व्यवहार में उतारकर ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को पूर्ण रूप से साकार किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. उमेश प्रसाद नीरज ने किया। उन्होंने विषय की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समकालीन प्रासंगिकता एवं भारतीय शिक्षा के बदलते स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अंत में डॉ. मनोज कुमार दास ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उपरोक्त अवसर पर विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. गौतम कुमार, डॉ. देशराज वर्मा, डॉ सीमा कुमारी, जे. आर. एफ. गौरव कुमार मिश्रा, सागर शर्मा, नीरज कुमार निर्मल, शहादत हुसैन सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर