दरभंगा में राहुल सांकृत्यायन जयंती पर संगोष्ठी, साहित्यिक अवदान पर हुई चर्चा

 


दरभंगा, 09 अप्रैल (हि.स.)। महापंडित राहुल सांकृत्यायन की जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में ‘हिन्दी साहित्य को राहुल सांकृत्यायन का अवदान’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने की, जबकि संचालन शोधार्थी दुर्गानंद ठाकुर ने किया। इस अवसर पर मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. पुनीता झा की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. पुनीता झा ने कहा कि साहित्य केवल कल्पना की उपज नहीं होता, बल्कि उसके पीछे ठोस सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक आधार होते हैं। साहित्य समाज की परिस्थितियों और समय की चुनौतियों को प्रतिबिंबित करता है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन हमारी संस्कृति और साहित्य के अभूतपूर्व संवाहक थे। उन्हें अनेक देशों और संस्कृतियों के बीच रहने तथा काम करने का अवसर मिला, जिसके कारण उनके लेखन में व्यापक दृष्टि और मानवीय सरोकार दिखाई देते हैं।

प्रो. विजय कुमार ने कहा कि हिन्दी साहित्य में एक दूसरी परंपरा की पहचान होती है, जो बुद्ध, सिद्ध, नाथ और कबीर की परंपरा है। राहुल सांकृत्यायन इसी वैचारिक धारा के लेखक थे। सह प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने कहा कि बुद्ध के बाद राहुल सांकृत्यायन और नागार्जुन ने भी ज्ञान और मुक्ति की तलाश में महाभिनिष्क्रमण किया। उन्होंने बताया कि मानव मुक्ति की खोज में राहुल सांकृत्यायन ने बौद्ध धर्म से मार्क्सवाद तक की वैचारिक यात्रा तय की।

इस अवसर पर डॉ. अनुरुद्ध सिंह, डॉ. भास्कर सहित शोधार्थी समीर, सुभद्रा, अभिनव सहित बड़ी संख्या में स्नातकोत्तर छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra