मढ़ौरा चीनी मिल को पुनर्जीवित करने के लिए एकदिवसीय धरना का हुआ आयोजन
सारण, 31 अगस्त (हि.स.)। मढ़ौरा वर्ष 1904 में स्थापित मढ़ौरा की ऐतिहासिक चीनी मिल को मढ़ौरा में ही पुनर्जीवित करने की मांग को लेकर एकदिवसीय धरना आयोजित किया गया। समाजसेवी नीरज कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आंदोलन को और मजबूत बनाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।
वक्ताओं ने कहा कि यह मिल केवल एक कारखाना नहीं, बल्कि क्षेत्र की औद्योगिक पहचान, किसानों की आय और मजदूरों के रोजगार का मुख्य आधार है। बैठक में हाल ही में मढ़ौरा के बजाय तरैया में नई चीनी मिल स्थापित करने की चर्चाओं पर गहरा रोष व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे किसी अन्य क्षेत्र के विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन मढ़ौरा की ऐतिहासिक मिल की कीमत पर कोई विकल्प स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आंदोलनकारियों का तर्क है कि मढ़ौरा में पहले से ही पर्याप्त कृषि क्षेत्र, रेल, सड़क, बिजली, नहर-सिंचाई और बाजार जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। अतः सरकार को किसी अन्य स्थान के बजाय मढ़ौरा में ही आधुनिक चीनी मिल, एथेनॉल संयंत्र और को-जनरेशन पावर प्लांट स्थापित करने की समयबद्ध कार्ययोजना बनानी चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र मढ़ौरा अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपा गया। नीरज कुमार ने कहा कि यह लड़ाई किसी दल विशेष की नहीं, बल्कि आम जनता के भविष्य की है।
धरना प्रदर्शन के बाद मढ़ौरा की पहचान बचानी है, चीनी मिल मढ़ौरा में ही लगानी है के नारे के साथ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर विष्णु गुप्ता, वीर आदित्य, दिलीप साह, अभिषेक राय और IITian अश्वनी कुमार सहित स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार