सारण के रिविलगंज में हनुमान जी को भगिना मान होती आराधना
सारण, 29 अक्टूबर (हि.स.)। बिहार के सारण जिले का रिविलगंज प्रखंड अपनी अनूठी परंपराओं के लिए देश भर में विशिष्ट पहचान रखता है। यहाँ शारदीय नवरात्र के समापन पर प्रतिमाओं का तुरंत विसर्जन नहीं होता, बल्कि पूर्णिमा के बाद कार्तिक मास में प्रतिपदा एवं शुभ मुहूर्त बजरंगबली की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
पौराणिक इतिहास के अनुसार यहाँ महर्षि गौतम का आश्रम स्थित है। लोकमान्यता है कि भगवान हनुमान जी का माता अंजनी, महर्षि गौतम और माता अहिल्या की पुत्री थीं, जिसके चलते इस भूमि को भगवान बजरंगबली का ननिहाल माना जाता है। यहाँ के लोग हनुमान जी को केवल आराध्य नहीं, बल्कि अपने परिवार का नाती, भगिना एवं सदस्य मानते हैं।
दशहरा के बाद निकलने वाली शोभायात्रा में बजरंगबली रथ पर सवार होकर घर-घर पहुँचते हैं, जहाँ श्रद्धालु अपनी भक्ति, श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार मेवा-मिष्ठान का भोग लगाकर उनकी आरती उतारते है तथा अगले वर्ष आने का प्रार्थना कर और फिर विदाई करते हैं।
रिविलगंज का विसर्जन शोभायात्रा अपने विशाल स्वरूप के लिए राज्यभर में विख्यात है। इस दौरान रिविलगंज से मांझी जाने वाला सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग 30 से 36 घंटे बड़े वाहनों के लिए बंद रहता है। लगभग 12 प्रमुख अखाड़ों के माध्यम से निकलने वाली इस शोभायात्रा में युवा पारंपरिक युद्ध कौशल का अद्भुत प्रदर्शन करते हैं।
पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश एवं बिहार तथा स्थानीय लोगों की अटूट आस्था का प्रमाण यह है कि यहाँ प्रतिमा स्थापना और पूजा के लिए वर्ष 2063 तक एडवांस बुकिंग हो चुकी है। इसके अलावा, 10 किलोमीटर के दायरे में लगने वाला प्रसिद्ध गोदना सिमरिया राजकीय मेला इसकी सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक सुदृढ़ करता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार