सारण में गंडक के पानी से पाँच प्रखंडों के 48 गांव बाढ़ से प्रभावित
सारण, 01 अक्टूबर (हि.स.)। जिले में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। जिले के पांच प्रमुख प्रखंडों पानापुर, तरैया, अमनौर, मकेर एवं परसा के अंतर्गत आने वाली 18 पंचायतों के 48 गांव गंडक के उफान की चपेट में हैं। प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा से क्षेत्र की लगभग 24,725 आबादी और करीब 4,220 परिवार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है और राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए जा रहे हैं। बाढ़ का पानी अब राष्ट्रीय राजमार्ग 722 पर भी आ पहुंचा है, जिससे आवागमन बुरी तरह बाधित हुआ है और कई लोग पानी के बीच फंस गए हैं। स्थिति का जायजा लेने और राहत कार्यों को गति देने के लिए जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव, तथा वरीय पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार, स्वयं नाव से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे।
दोनों अधिकारियों ने पानी में फंसे लोगों के रेस्क्यू अभियान का प्रत्यक्ष रूप से नेतृत्व किया। इसके अतिरिक्त, मकेर प्रखंड की बाढ़ प्रभावित पंचायतों से भी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का काम युद्धस्तर पर जारी है। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशासन की प्राथमिकता प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना और सहायता प्रदान करना है।
वर्तमान में क्षेत्र में स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरफ और एसडीआरएफ की तीन टीमें तैनात हैं। साथ ही साथ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर आवाजाही के लिए 33 नावें और 1 बोट एंबुलेंस संचालित की जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं हेतु 5 चिकित्सा शिविर तथा मवेशियों के लिए पशु चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं। इसके अतरिक्त एक राहत केंद्र संचालित है, जहां वर्तमान में पचास आश्रयार्थी रह रहे हैं।
इसके अलावा बेघर हुए लोगों के लिए 950 पॉलीथिन शीट का वितरण किया जा चुका है और अन्य प्रभावितों के बीच वितरण जारी है। बाढ़ पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रभावित पांचों प्रखंडों में कुल 14 सामुदायिक रसोई शुरू की गई हैं, आवश्यकता पड़ने पर और भी सामुदायिक रसोई बढ़ाया जाएगा। 14 सामुदायिक रसोई के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 5,000 लोगों को भोजन कराया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राहत सामग्री, चिकित्सा सुविधा और भोजन की उपलब्धता में कोई कोताही न बरती जाए। जलस्तर में होने वाले बदलावों पर सतत नजर रखी जा रही है। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, नदी व तटबंध के संवेदनशील इलाकों में जाने से बचें और आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार