संस्कार भारती ने सूर्य वंदना और नागरिक कर्तव्यों के संकल्प के साथ मनाया नव वर्ष
सारण, 19 मार्च (हि.स.)। कला एवं साहित्य के क्षेत्र में कार्य करने वाली अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती सारण जिला इकाई के तत्वावधान में भारतीय नव वर्ष विक्रम संवत के अभिनंदन हेतु आयोजित नवप्रभात कार्यक्रम पूरी उत्साह के साथ संपन्न हुआ। शहर के ऐतिहासिक शाह बनवारी लाल सरोवर के तट पर आयोजित इस भव्य समारोह ने न केवल सूर्य की पहली किरण का स्वागत किया बल्कि आधुनिक पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का एक सशक्त संदेश भी दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्ममुहूर्त में सरोवर के शांत और मनोरम तट पर हुआ। जैसे ही भगवान भास्कर की पहली स्वर्णिम किरण ने सरोवर के जल को स्पर्श किया पूरा वातावरण सामूहिक सूर्य वंदना और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर स्थानीय कलाकारों द्वारा मनमोहक नृत्य और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संस्कार भारती के प्रांतीय कला टोली सदस्य राजेश चंद्र मिश्र ने आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नवप्रभात का लक्ष्य छपरा की सांस्कृतिक एकता को एक नई पहचान देना है। उन्होंने कहा यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं बल्कि अपनी परंपराओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक पवित्र माध्यम है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रांत बौद्धिक प्रमुख रामदयाल शर्मा ने नागरिक कर्तव्य विषय पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया । उन्होंने वर्तमान पीढ़ी को आईना दिखाते हुए कहा कि आज के दौर में हम अपने अधिकारों के प्रति तो अत्यंत मुखर हैं लेकिन अपने कर्तव्यों को विस्मृत कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण की शुरुआत बड़ी घोषणाओं से नहीं बल्कि हमारी छोटी-छोटी आदतों से होती है। यदि आप कहीं पानी का नल खुला देखें, तो उसे तुरंत बंद करें यह जल संरक्षण केवल सरकार का दायित्व नहीं बल्कि हमारा व्यक्तिगत धर्म है। उन्होंने ने सड़क सुरक्षा, स्वच्छता और सार्वजनिक अनुशासन को एक सुसंस्कृत नागरिक की प्राथमिक पहचान बताया। उन्होंने कहा कि हमारे संवाद में बड़ों के प्रति आदर और विनम्रता ही समाज में प्रेम और सद्भाव घोलने का कार्य करती है।
पर्यावरण संरक्षण को ईश्वरीय कार्य बताते हुए कहा कि यदि हमने अपनी नदियों और वृक्षों को नहीं बचाया, तो आने वाली पीढ़ियां असुरक्षित होंगी। उन्होंने जल, जीवन और वृक्ष के संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी पूजा बताया। वहीं कुटुंब प्रबोधन पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने परिवार को समाज सुधार का केंद्र बिंदु माना। उन्होंने आह्वान किया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में परिवार के सदस्यों का साथ बैठकर भोजन करना और आपस में बातचीत करना अनिवार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि जब घर की नींव संस्कारों से मजबूत होगी, तब राष्ट्र स्वतः ही सशक्त और संगठित हो जाएगा।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी नागरिकों, बुद्धिजीवियों और युवाओं ने प्रकृति और परिवार के बीच संतुलन बनाए रखने तथा एक समरस समाज की स्थापना में अपना पूर्ण योगदान देने का सामूहिक संकल्प लिया।
कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। कलाकारों को संस्कार भारती द्वारा सम्मान पत्र एवं अंग वस्त्र से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक मोहित कुमार सिंह, संस्कार भारती के प्रांत महामंत्री सुरभित दत्त, संस्कार भारती पूर्व जिला अध्यक्ष प्रो सुधा बाला, राजेंद्र कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य संजय कुमार, प्रोफेसर अनुपम कुमार सिंह, ओम प्रकाश गुप्ता, पंडित राम प्रकाश मिश्रा सहित भारी संख्या में नागरिक और उत्साही युवा उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार