सिद्धाश्रम का संपूर्ण इतिहास सामने लाएंगे : अश्विनी कुमार चौबे
बक्सर, 22 सितंबर (हि.स.)। भगवान वामन के जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर मंगलवार को स्थानीय गोयल धर्मशाला सभागार में श्रीराम कर्मभूमि न्यास, सिद्धाश्रम के तत्वावधान में विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी का विषय ‘सिद्धाश्रम वामनाश्रम : सभ्यता विकास की आदि भूमि, संदर्भ, आकांक्षा, संकल्प एवं सिद्धि’ रहा। इसमें सिद्धाश्रम के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को सामने लाने तथा वामन जन्मभूमि के विकास को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
न्यास के संस्थापक न्यासी एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि भगवान विष्णु ने हजारों वर्षों तक तपस्या कर विद्यादान की परंपरा चलाई थी। इसी तपोभूमि के कारण इस क्षेत्र का नाम सिद्धाश्रम हुआ। इसी पवित्र भूमि पर भगवान विष्णु ने वामन रूप में अवतार लिया था। उन्होंने कहा कि वामन भगवान लोक के मन में चेतना जागृत कर समस्याओं का समाधान करने वाले देवता हैं।
चौबे ने कहा कि परमात्मा की प्रेरणा और कृपा से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वामन जन्मभूमि को जेल की चारदीवारी से मुक्त कराकर एक कलंक को मिटाने का कार्य किया है। अब सिद्धाश्रम का संपूर्ण इतिहास लोगों के सामने लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार वामन भगवान एवं सिद्धाश्रम के गौरव की पुनर्स्थापना के लिए संबंधित संगठनों, संस्थाओं और संत-महात्माओं से विमर्श कर वामन जन्मभूमि को भव्य एवं दिव्य स्वरूप देने की योजना बनाए।
उन्होंने कहा कि संतों, गृहस्थों और समाज के सभी वर्गों के सक्रिय एवं आध्यात्मिक सहयोग से सिद्धाश्रम को विश्व की समस्याओं के समाधान का केंद्र बनाया जा सकता है। यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति का आदि केंद्र है। वामन भगवान की इस ज्ञानभूमि को उसका मूल गौरव दिलाने के लिए समाज और सरकार को मिलकर कार्य करना होगा।
गोष्ठी की अध्यक्षता न्यास के अध्यक्ष कृष्णकांत ओझा ने की। उन्होंने कहा कि लोक के मन में चेतना और संगठन की भावना जगाने वाले वामन वास्तव में लोकतंत्र के देव और अधिष्ठाता हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / Jitendra Kumar Mishra