वैदिक परंपरा से मंडन भारती सरोवर में हुई मां गंगा की भव्य आरती

 

बिहार,05 नवंबर (हि.स.)। शहर सहरसा के न्यू कॉलनी स्थित भारती मंडन मिश्र सरोवर में जिला गंगा समिति सहरसा के तत्वावधान में बुधवार की संध्या गंगा उत्सव-2026 के अवसर पर पूरे विधि-विधान एवं वैदिक परंपरा के अनुरूप मां गंगा की भव्य आरती की गई। आरती के दौरान दीपों की जगमगाहट, शंखनाद एवं भक्तिमय संगीत ने भारती मंडन मिश्र सरोवर परिसर को अलौकिक एवं आध्यात्मिक छटा से आलोकित कर दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा एवं भक्तिभाव से आरती में सहभागिता की तथा सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। गंगा आरती के पूर्व

वैदिक मंत्रोच्चारण एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न हुई। इस अवसर पर श्रीउग्रतारा वेद विद्यालय, महिषी के नन्हे वेदपाठी बच्चों द्वारा सस्वर वैदिक मंत्रों के उच्चारण से संपूर्ण सरोवर परिसर भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण से गुंजायमान हो उठा।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार गंगा नदी को भारत की राष्ट्रीय नदी घोषित किए जाने के बाद प्रत्येक वर्ष 4 नवंबर को गंगा उत्सव मनाया जा रहा है।

इसी कड़ी में वर्ष 2026 में गंगा बेसिन के पाँच राज्यों की 139 जिला गंगा समितियों के माध्यम से गंगा उत्सव-2026 का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बिहार राज्य की 38 जिला गंगा समितियां भी शामिल हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी एवं उसकी सहायक नदियों के संरक्षण, स्वच्छता एवं निर्मलता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आम नागरिकों, युवाओं एवं स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।

कार्यक्रम में गंगा नदी के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए गंगा उत्सव केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नदियों के संरक्षण, स्वच्छता एवं निर्मलता के प्रति जन-जागरूकता विकसित करने का एक महत्वपूर्ण अभियान का संदेश दिया। गंगा नदी भारतीय सभ्यता, संस्कृति एवं आस्था की अमूल्य धरोहर होने के साथ-साथ करोड़ों लोगों के जीवन एवं आजीविका का आधार है। अतः इसका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के माध्यम से आम नागरिकों से अपील की गई कि वे गंगा सहित अपनी स्थानीय नदियों, तालाबों, पोखरों एवं अन्य जल स्रोतों को स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त रखने में सक्रिय योगदान दें। जल संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाएं तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित जल संसाधनों के संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजय कुमार सोनी