सरयू में नाव परिचालन पर पूर्ण रोक, दाहा नदी के जर्जर स्लूइस गेट से किसानों की बढ़ी चिंता

 




सीवान, 08 सितंबर (हि.स.)। जिले के

दरौली एवं सिसवन प्रखंड में सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने नदी में छोटे-बड़े सभी प्रकार के नावों के परिचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

मंगलवार को दरौली थाना परिसर में अंचल अधिकारी एवं थाना प्रभारी की संयुक्त अध्यक्षता में मछुआरों, स्ट्रीमर एवं नाव मालिकों के साथ बैठक की गयी। बैठक में नदी के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न खतरे को देखते हुए नाव मालिकों को सख्त हिदायत दी गयी कि वे किसी भी परिस्थिति में नाव का संचालन नहीं करें। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और मछुआरों से भी नदी में नहीं जाने की अपील की है।

अधिकारियों ने कहा कि सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और नदी की तेज धारा के कारण कभी भी दुर्घटना हो सकती है। ऐसे में लोग प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। इधर, सिसवन-रामगढ़ गांव के समीप दाहा नदी पर स्थित जर्जर स्लूइस गेट से पानी का रिसाव शुरू होने के बाद आसपास के गांवों के किसानों की चिंता बढ़ गयी है। पिछले तीन-चार दिनों से नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण गेट पर पानी का दबाव बढ़ गया है। जर्जर गेट से रिस रहा पानी धीरे-धीरे रामगढ़ और पिपरा गांव के चंवर की ओर बढ़ रहा है। जलस्तर में वृद्धि जारी रही और रिसाव पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो चंवर में लगी धान की फसल जलमग्न हो सकती है।

ग्रामीणों के अनुसार, पिछले करीब आठ वर्षों से दाहा नदी का जलस्तर बढ़ते ही जर्जर स्लूइस गेट से पानी का रिसाव शुरू हो जाता है। पानी आसपास के चंवर में फैलकर खरीफ की फसल को नुकसान पहुंचाता है। उनका कहना है कि अब तक करीब 1500 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में लगी खरीफ की फसल इस समस्या के कारण बर्बाद हो चुकी है। पिपरा, जानी छपरा, रामगढ़ और महमदपुर सहित आसपास के गांवों के किसान हर वर्ष इस समस्या का सामना करते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पइन का बांध भी लंबे समय से जर्जर है। जगह-जगह बांध कमजोर होने के कारण पानी निर्धारित मार्ग से बहने के बजाय खेतों में फैल जाता है। ग्रामीण टिंकू तिवारी, कमलदेव तिवारी, विकास सिंह सहित अन्य लोगों ने पइन के बांध और दोनों स्लूइस गेट की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है।

ग्रामीणों के मुताबिक दाहा नदी के किनारे सेमरी, हुसेना, कठतल, नयागांव सहित विभिन्न स्थानों पर करीब दर्जनभर स्लूइस गेट बदहाल हैं। करीब 35 वर्ष पहले इनका निर्माण सिंचाई और बाढ़ से फसलों की सुरक्षा के उद्देश्य से कराया गया था।

रखरखाव के अभाव में अधिकांश गेट जर्जर हो चुके हैं। वर्ष 2021 में कठतल गांव के जर्जर स्लूइस गेट के कारण मलई बांध टूट गया था और मधवापुर क्षेत्र में बाढ़ का पानी फैल गया था। ग्रामीणों ने प्रशासन से समय रहते सभी जर्जर स्लूइस गेटों और पइन के बांधों की मरम्मत कराने की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma