धान की फसल को फॉल्स स्मट (कंडुआ) रोग से बचाएं किसान : डीएओ

 


कटिहार, 13 सितंबर (हि.स.)। धान की फसल में बालियां निकलने के समय फॉल्स स्मट यानी कंडुआ रोग के प्रसार की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने जिले के किसानों के लिए आवश्यक तकनीकी एडवाइजरी जारी की है। जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) राजीव कुमार ने किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने की सलाह देते हुए कहा है कि यह फफूंदजनित रोग सीधे बालियों को नुकसान पहुंचाता है। इसमें स्वस्थ दाने के स्थान पर पीले, नारंगी या हरे-काले रंग के फफूंदयुक्त गोलाकार पिंड बनने लगते हैं, जिससे पैदावार घटने के साथ-साथ उपज का बाजार मूल्य भी गिर जाता है।

डीएओ ने बताया कि यह रोग 'अस्टिलागिनोइडेया विरेन्स' नामक फफूंद के कारण फैलता है। बालियां निकलने और फूल आने के दौरान वातावरण में अत्यधिक नमी, लगातार बादल छाए रहने या बारिश की स्थिति में इसका प्रकोप तेजी से बढ़ता है। इसके अलावा खेतों में यूरिया का असंतुलित व अत्यधिक इस्तेमाल और फसल का बहुत घना होना भी संक्रमण को बढ़ावा देता है। इस रोग के बीजाणु खेत एवं फसल अवशेषों में बने रहते हैं, जिससे अगली फसल और विशेषकर बीज उत्पादन वाले खेतों में भारी क्षति की आशंका बनी रहती है।

फसल सुरक्षा के लिए किसानों को यांत्रिक और रासायनिक दोनों तरह के प्रबंधन अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। संक्रमण दिखते ही किसान रोगग्रस्त बालियों और पिंडों को सावधानीपूर्वक कैंची या हाथ से काटकर खेत से अलग कर लें और उन्हें गड्ढे में दबाकर नष्ट कर दें। इन्हें खेत में खुला न छोड़ें और न ही पशु चारे या बीज के रूप में उपयोग करें। रासायनिक उपचार के तहत बूटिंग अवस्था में प्रोपिकोनाजोल 25% ईसी (1 मिली प्रति लीटर पानी) अथवा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% डब्ल्यूपी (2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) का कृषि विशेषज्ञों की सलाह से छिड़काव करें। वहीं जैविक प्रबंधन के लिए ट्राइकोडर्मा अथवा स्यूडोमोनास आधारित फॉर्मुलेशन से बीज शोधन की भी सलाह दी गई है। जिला कृषि पदाधिकारी ने किसानों से संतुलित खाद प्रबंधन अपनाने और किसी भी संशय की स्थिति में तुरंत प्रखंड कृषि पदाधिकारी या कृषि समन्वयक से संपर्क करने का आह्वान किया है।

हिन्दुस्थान समाचार / विनोद सिंह