किशनगंज में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली उजागर, अस्पतालों में मरीज नहीं, रखी जा रही मक्के की फसल

 


किशनगंज, 19 जून (हि.स.)। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। करोड़ों रुपये की लागत से बने उप स्वास्थ्य केंद्र आज मरीजों के इलाज के बजाय उपेक्षा और अव्यवस्था के प्रतीक बन गए हैं। कहीं अस्पताल के कमरों में मक्के की फसल और जलावन की लकड़ियां रखी जा रही हैं तो कहीं स्वास्थ्य केंद्र ऐसी जगह बना दिया गया है जहां मरीजों का पहुंचना ही मुश्किल है।

ठाकुरगंज प्रखंड की भोगडाबर पंचायत स्थित ग्वालटोली उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। ग्रामीणों के अनुसार करीब दस वर्ष पूर्व बने इस केंद्र में आज तक नियमित रूप से कोई डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी सेवा देने नहीं पहुंचा। अस्पताल परिसर तक पहुंचने के लिए लोगों को सूखे मौसम में भी जलजमाव से होकर गुजरना पड़ता है। अस्पताल के कमरों में मरीजों और दवाइयों की जगह किसानों द्वारा मक्के के पौधे, सूखी घास तथा जलावन की लकड़ियां रखी गई हैं। इससे स्पष्ट है कि केंद्र लंबे समय से बंद पड़ा हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि अस्पताल निर्माण के लिए स्थानीय लोगों ने अपनी जमीन दान में दी थी ताकि गांववासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें, लेकिन आज भी उन्हें इलाज के लिए ठाकुरगंज जाना पड़ता है।आपातकालीन स्थिति में प्राथमिक उपचार तक उपलब्ध नहीं हो पाता।

इसी तरह दिघलबैंक प्रखंड की करुआमनी पंचायत का उप स्वास्थ्य केंद्र भी अव्यवस्था का शिकार है। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह भवन रिहायशी इलाके से दूर नदी किनारे और पुल के नीचे बना दिया गया है। अस्पताल के चारों ओर घना जंगल और झाड़ियां उगी हुई हैं। भवन तक पहुंचने का रास्ता भी बेहद कठिन है। बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ जाने पर अस्पताल तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है। केंद्र में नियुक्त एएनएम और अन्य कर्मियों ने बताया कि ड्यूटी के लिए उन्हें आना पड़ता है, लेकिन बारिश के समय रास्ता बंद होने पर पुल के नीचे बैठकर मरीजों का इलाज करना पड़ता है। अस्पताल परिसर में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।

मामले पर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनवर हुसैन ने कहा कि संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर अस्पतालों के लिए पहुंच मार्ग की समस्या दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन के सहयोग से आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से उपेक्षित इन स्वास्थ्य केंद्रों को जल्द चालू कर ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह