कटे होंठ-तालू के इलाज के लिए पटना भेजे गए दो बच्चे

 


किशनगंज, 26 अक्टूबर (हि.स.)। जन्मजात बीमारी के कारण बच्चों के बेहतर भविष्य की चिंता झेल रहे परिवारों के लिए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था उम्मीद की नई किरण बन रही है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत किशनगंज जिले के दो बच्चों को कटे होंठ एवं कटे तालू के उपचार के लिए सोमवार को निःशुल्क एम्बुलेंस से पटना स्थित मेडिवर्सल अस्पताल भेजा गया। इनमें पोठिया प्रखंड की 12 वर्षीय सोनिया कुमारी और किशनगंज प्रखंड के दो वर्षीय आकाश मरांडी शामिल हैं।

इस पहल से परिवारों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा तक पहुंचने में मदद मिलने के साथ यात्रा के खर्च से भी राहत मिलने की उम्मीद है। जन्मजात समस्याओं से प्रभावित बच्चों के लिए विशेषज्ञ उपचार तक पहुंचना कई बार आर्थिक तंगी और दूरी के कारण मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आरबीएसके के माध्यम से बच्चों की पहचान, स्क्रीनिंग और उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफरल की व्यवस्था जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

सोनिया के पिता अमल कुमार सिंह ने कहा कि बच्चे का इलाज कराना हर माता-पिता की प्राथमिकता होती है, लेकिन दूर अस्पताल जाने और महंगे उपचार का खर्च उठाना आसान नहीं है। सरकारी सुविधा और निःशुल्क एम्बुलेंस मिलने से परिवार को काफी सहारा मिला है। उन्हें उम्मीद है कि बेटी को उचित उपचार मिलेगा और उसका भविष्य बेहतर होगा। कटे होंठ, कटे तालू और जीभ की गांठ जैसी समस्याओं की पहचान एवं उपचार के लिए जिले में 2 अक्टूबर से 14 नवंबर तक विशेष शिविर अभियान चलाया जा रहा है। इससे पहले बहादुरगंज प्रखंड के बिराज कुमार ठाकुर और कोचाधामन प्रखंड के निसार बाबू को भी उपचार के लिए मेडिवर्सल अस्पताल भेजा जा चुका है। जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि बच्चों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। आर्थिक कठिनाई किसी बच्चे के उपचार में बाधा नहीं बननी चाहिए। वहीं, सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि आरबीएसके के तहत चिह्नित बच्चों को आवश्यक चिकित्सा सेवाओं से जोड़ने का प्रयास जारी है। डीपीएम डॉ. मुनाजिम ने भी स्क्रीनिंग, रेफरल और निःशुल्क परिवहन को जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह