गंभीर जन्मजात बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए जीवनदायिनी बनी आरबीएसके योजना
किशनगंज, 19 मार्च (हि.स.)। जिले में गंभीर जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) वरदान साबित हो रहा है। यह योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को निःशुल्क जांच, रेफरल और उच्च स्तरीय अस्पतालों में इलाज की सुविधा देकर उन्हें नया जीवन दे रही है। इसी क्रम में गुरुवार को सदर अस्पताल किशनगंज से जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित दो बच्चों राजेंद्र कुमार और रागिनी कुमारी तथा कटे होंठ-तालु से पीड़ित अनीशा कुमारी को बेहतर इलाज के लिए पटना स्थित आईजीआईएमएस भेजा गया।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि जन्मजात हृदय रोग और कटे होंठ-तालु जैसी बीमारियों का इलाज काफी महंगा और जटिल होता है, जिसे सामान्य परिवार वहन नहीं कर पाते। ऐसे में आरबीएसके योजना के तहत बच्चों को निःशुल्क जांच, रेफरल और बड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जो गरीब परिवारों के लिए बड़ा सहारा बन रही है। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक कई बच्चों को इस योजना के माध्यम से लाभ मिल चुका है।
समय पर पहचान और उचित इलाज से कई बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग कर रही है, ताकि कोई भी जरूरतमंद बच्चा इस सुविधा से वंचित न रह जाए। पटना के लिए रवाना किए गए बच्चों के परिजन भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि इस योजना के बिना बच्चों का इलाज संभव नहीं था। अब उन्हें उम्मीद है कि उनके बच्चे भी स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकेंगे।
सडीपीएम डॉ. मुनाजिम ने कहा कि जन्मजात बीमारियों की समय पर पहचान और सही इलाज से उन्हें पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से लगातार स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम न केवल बच्चों को नया जीवन दे रहा है, बल्कि गरीब परिवारों के लिए आशा और विश्वास का मजबूत आधार भी बनता जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह