आरबीएसके ने सिफत के कदमों को दी नई उड़ान, नि:शुल्क इलाज से लौटी उम्मीद
किशनगंज, 23 अगस्त (हि.स.)। कोचाधामन प्रखंड के सोनथा गांव की सात वर्षीय सिफत परवीन के परिवार के लिए बेटी का इलाज लंबे समय से चिंता का कारण बना हुआ था। जन्मजात रूप से मुड़े पैर (क्लबफुट) की समस्या से जूझ रही सिफत के सामान्य रूप से चलने और भविष्य को लेकर परिजन परेशान थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण महंगे इलाज की चिंता ने परिवार की उम्मीद और कमजोर कर दी थी।
इसी बीच राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत सिफत की स्वास्थ्य समस्या की पहचान हुई।स्वास्थ्य विभाग की पहल पर उसे बेहतर उपचार के लिए जेएलएनएमसीएच, भागलपुर भेजा गया, जहां 27 मार्च 2026 को क्लबफुट की सर्जरी नि:शुल्क कराई गई। सरकारी योजना के तहत बिना किसी आर्थिक बोझ के उपचार मिलने से परिवार को बड़ी राहत मिली।
सिफत की मां ने बताया कि बेटी के इलाज को लेकर हमेशा डर बना रहता था। उन्हें लगता था कि ऑपरेशन में काफी खर्च आएगा, जिसे परिवार वहन नहीं कर पाएगा। आरबीएसके के माध्यम से नि:शुल्क उपचार मिलने के बाद परिवार का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है। अब उन्हें उम्मीद है कि सिफत सामान्य बच्चों की तरह चल सकेगी और अपने सपनों को पूरा करेगी।
रविवार को सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि वर्ष 2025 में जिले के 10 क्लबफुट से पीड़ित बच्चों का उपचार एवं सर्जरी कराई गई, जबकि वर्ष 2026 में अब तक पांच बच्चों को इसका लाभ मिल चुका है। जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित 16 बच्चों की वर्ष 2025 में और छह बच्चों की वर्ष 2026 में सर्जरी कराई गई है। वहीं बाल श्रवण योजना के तहत तीन तथा कटे होंठ एवं तालू की समस्या से पीड़ित तीन बच्चों को भी सर्जरी की सुविधा मिली है। वर्ष 2025 में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के दो बच्चों का उपचार भी कराया गया।
जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि आर्थिक स्थिति किसी बच्चे के इलाज और भविष्य में बाधा नहीं बननी चाहिए। आरबीएसके के माध्यम से बच्चों की समय पर पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों में जन्मजात विकृति या अन्य स्वास्थ्य समस्या दिखने पर समय पर स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क करने की अपील की।
सिफत का उपचार अब उन परिवारों के लिए भी उम्मीद का संदेश है, जो आर्थिक परेशानी के कारण बच्चों के इलाज को लेकर चिंतित रहते हैं। समय पर पहचान और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ लेकर बच्चों को बेहतर जीवन की राह दिखाई जा सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह