राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकतम मामलों के निष्पादन पर जोर
सुपौल, 08 सितंबर (हि.स.)। आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत, 12 सितंबर 2026 को सफल बनाने एवं अधिकाधिक लंबित मामलों का निष्पादन सुनिश्चित करने को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा तैयारियां तेज कर दी गई हैं। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार राजेश कुमार बच्चन के निर्देश पर विभिन्न स्तरों पर बैठकें आयोजित कर समझौता योग्य मामलों की पहचान एवं उनके निस्तारण की रणनीति बनाई जा रही है। इसी क्रम में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय राहुल उपाध्याय के न्यायिक कक्ष में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण से संबंधित मामलों के शीघ्र एवं अधिकतम निष्पादन को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई।
बैठक में एमएसीटी मामलों से जुड़े अधिवक्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण, संबंधित पक्षकारों के बीच आपसी सहमति की संभावनाओं तथा लोक अदालत के माध्यम से अधिकाधिक मामलों के समाधान को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अमित गौरव भी मौजूद रहे। बैठक का उद्देश्य ऐसे पात्र मामलों की पहचान करना रहा, जिनका निस्तारण दोनों पक्षों की सहमति से लोक अदालत के माध्यम से शीघ्र किया जा सकता है।
अधिकारियों ने संबंधित पक्षकारों को लोक अदालत के लाभों की जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। इसी क्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल राजेश कुमार बच्चन के निर्देश पर एक अन्य महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसकी संयुक्त अध्यक्षता रामचंद्र प्रसाद एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अमित गौरव ने की। बैठक में दंडनीय समझौता योग्य आपराधिक मामले, विधिक माप-विज्ञान एवं बाट-माप से संबंधित मामले, वन अधिनियम के मामले, परक्राम्य लिखत अधिनियम सहित अन्य ऐसे मामलों के अधिकतम निष्पादन पर विशेष जोर दिया गया, जिनका समाधान आपसी सहमति और समझौते के आधार पर राष्ट्रीय लोक अदालत में किया जा सकता है।
न्यायिक पदाधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के दौरान लंबित मामलों की पहचान करने, संबंधित पक्षकारों को नोटिस एवं सूचना उपलब्ध कराने तथा समझौते की संभावना वाले मामलों को प्राथमिकता के आधार पर आगामी लोक अदालत में प्रस्तुत करने पर चर्चा की गई। बैठक में अफजल आलम,नंदिता कुमारी, निधि कुमारी, सुदीप कुमार, मुंसिफ, श्वेताभ सैंडिल्या एवं स्वाति चतुर्वेदी सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
12 सितंबर को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल की ओर से आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे 12 सितंबर 2026 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का अधिकाधिक लाभ उठाएं। लोक अदालत के माध्यम से पात्र मामलों का निस्तारण आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर अपेक्षाकृत शीघ्रता से किया जा सकता है। इससे पक्षकारों के समय एवं धन दोनों की बचत होती है और लंबे समय से लंबित मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान संभव होता है।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र