राष्ट्रीय संगोष्ठी में एक राष्ट्र, एक चुनाव एवं डिजिटल लोकतांत्रिक सशक्तिकरण पर हुआ गहन राष्ट्रीय विमर्श
बक्सर, 17 जुलाई (हि.स.)।महार्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली के प्रायोजन से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी विकसित भारत @2047 के लिए भारत की निर्वाचन प्रणाली का पुनर्निर्माण : एक राष्ट्र, एक चुनाव एवं डिजिटल लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की ओर के प्रथम दिवस का आयोजन हुआ। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों से पधारे कुलपति, पूर्व कुलपति, प्राध्यापक, शिक्षाविद्, शोधार्थी एवं प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता ने इस संगोष्ठी को राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण अकादमिक मंच प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि विश्वामित्र की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा स्वागत गीत एवं कुलगीत की प्रस्तुति दी गई तथा सभी अतिथियों का अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मान किया गया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के अध्यक्ष एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कृष्णकांत सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं तकनीक-सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र, एक चुनाव जैसे महत्वपूर्ण विषय पर गंभीर शैक्षणिक विमर्श राष्ट्रहित में नीतिगत दिशा प्रदान करेगा तथा यह संगोष्ठी लोकतांत्रिक सुधारों पर सार्थक विचार-विमर्श का प्रभावी मंच सिद्ध होगी।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक एवं स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद वर्मा ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि यह संगोष्ठी भारतीय लोकतंत्र की समकालीन चुनौतियों, निर्वाचन सुधारों एवं डिजिटल लोकतांत्रिक सशक्तिकरण पर व्यापक संवाद स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि संविधान, संघीय व्यवस्था, निर्वाचन आयोग, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं जनसहभागिता के समन्वय से ही विकसित भारत की लोकतांत्रिक परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।
आयोजन सचिव डॉ. आलोक कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य देशभर के शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों को एक साझा मंच प्रदान कर निर्वाचन प्रणाली से जुड़े समकालीन मुद्दों पर गंभीर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. प्रकाश मणि त्रिपाठी, पूर्व कुलपति, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक ने भारतीय लोकतंत्र की सुदृढ़ परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि निर्वाचन सुधार लोकतांत्रिक प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुख बनाने की दिशा में आवश्यक कदम हैं।
विशिष्ट अतिथि प्रो. तपन कुमार शांडिल्य, पूर्व कुलपति, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची तथा प्रो. सतीश कुमार राय, प्रोफेसर, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती, निर्वाचन सुधारों तथा संघीय व्यवस्था के विभिन्न आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
प्रथम दिवस में आयोजित प्रथम अकादमिक सत्र का विषय एक राष्ट्र, एक चुनाव का अवधारणात्मक आधार एवं वैश्विक तुलनात्मक विश्लेषण था। इस सत्र में प्रो. अनुप मिश्रा (डी.ए.वी. पी.जी. कॉलेज, वाराणसी), प्रो. अभिनव शर्मा (राजनीति शास्त्र विभाग, बीएचयू) तथा प्रो. जितेन्द्र नारायण (ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा) ने विभिन्न देशों की चुनाव प्रणाली, भारतीय लोकतंत्र में एक राष्ट्र-एक चुनाव की संभावनाओं एवं चुनौतियों पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किए।
इसके उपरांत आयोजित द्वितीय अकादमिक सत्र का विषय एक राष्ट्र, एक चुनाव : संवैधानिक, विधिक एवं संरचनात्मक ढाँचा रहा। इस सत्र में डॉ. विकास त्रिपाठी (गुवाहाटी विश्वविद्यालय), डॉ. भारती श्वेता (बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर), डॉ. तबस्सुम बानो (वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा), डॉ. आशा प्रसाद (आर.एन. कॉलेज) तथा डॉ. शमशाद अंसारी (मगध विश्वविद्यालय) ने संवैधानिक संशोधनों, संघीय ढाँचे, निर्वाचन आयोग की भूमिका एवं प्रशासनिक व्यवहार्यता पर अपने विचार रखे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / Jitendra Mishra