टीएमबीयू के गांधी विचार विभाग में गूंजी पेंशनरों की आवाज, मांगों को लेकर 'पेंशन सत्याग्रह' का शंखनाद
भागलपुर, 02 अक्टूबर (हि.स.)।तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय का स्नातकोत्तर गांधी विचार विभाग परिसर शुक्रवार को एक बार फिर बड़े वैचारिक और सामाजिक आंदोलन का गवाह बना। विश्वविद्यालय के करीब 2,669 सेवानिवृत्त कर्मचारियों और शिक्षकों की लंबित पेंशन व अन्य सेवांत लाभों के भुगतान की मांग को लेकर 'पेंशन सत्याग्रह' का औपचारिक आयोजन किया गया।
सत्याग्रह में मुख्य वक्ता के रूप में पेंशनर संघर्ष मंच के संयोजक पवन कुमार सिंह ने बुजुर्ग पेंशनरों की पीड़ा को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षा विभाग के बीच आपसी सामंजस्य न होने का खामियाजा उन वरिष्ठ नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन इस संस्थान को सींचने में लगा दिया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित मंच के अन्य पदाधिकारियों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष शांतिपूर्ण और सत्याग्रही तरीके से बैठकर विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार के रवैये के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। सत्याग्रह के दौरान वरिष्ठ नागरिक पेंशनरों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा अनुदान जारी किए जाने और समय-समय पर आवंटन मिलने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन उनके भुगतान में जानबूझकर देरी कर रहा है। वक्ताओं ने कहा कि कई महीनों की पेंशन और एरियर राशि अटकी होने के कारण बुजुर्गों के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसके साथ ही वेतन सत्यापन कोषांग की पे-स्लिप न मिलने के नाम पर सेवांत लाभों में की जा रही कटौती और सामर्थ पोर्टल की तकनीकी अड़चनों को लेकर भी गहरा रोष प्रकट किया गया। आंदोलनकारियों ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूर्व में पेंशन भुगतान के बदले रिश्वत के लेन-देन से जुड़े कथित ऑडियो वायरल होने के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हुई है। इस अवसर पर उपस्थित पेंशनरों ने कुलसचिव प्रो. रमाशिश पूर्वे और वित्त पदाधिकारी के समक्ष अपनी चिंताएं रखीं और साफ किया कि अब खोखले आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। सत्याग्रह के समापन पर आंदोलनकारियों के एक शिष्टमंडल ने कुलपति कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों से संबंधित एक विस्तृत स्मार-पत्र सौंपा। पेंशनर संघर्ष मंच के संयोजक पौन कुमार सिंह ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी जायज मांगों पर शीघ्र और सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो इस गांधीवादी 'पेंशन सत्याग्रह' को उग्र चरणबद्ध आंदोलन और अनिश्चितकालीन धरने में बदल दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर