मनरेगा मजदूरों के हड़ताल के समर्थन में ऐक्टू ने किया प्रदर्शन

 


भागलपुर, 20 मई (हि.स.)। 700 रुपया प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी और साल में 200 दिन काम के प्रावधान के साथ मनरेगा को पुनर्बहाल करने आदि के सवाल पर बुधवार को मनरेगा मजदूरों की देशभर में एक दिवसीय हड़ताल हुई।

हड़ताल के समर्थन में ऐक्टू ने अपने मई अभियान के 20वें दिन जगदीशपुर प्रखंड के चांदपुर पंचायत में जोरदार प्रदर्शन कर मनरेगा मजदूरों के साथ एकजुटता जाहिर की। प्रदर्शन में बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन और असंगठित कामगार महासंघ से जुड़े चांदपुर पंचायत के सैकड़ों महिला – पुरुष भागीदारी की।

प्रदर्शन का नेतृत्व ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त, जिला संयुक्त सचिव राजेश कुमार, बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन के जिला उपाध्यक्ष दिनेश कापरी और सोनी देवी एवं असंगठित कामगार महासंघ के सहसंयोजक बिंदो देवी ने संयुक्त रुप से किया।

मजदूरों को संबोधित करते हुए ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त ने मौके पर कहा कि मांग आधारित काम की गारंटी वाला कानून खत्म कर केंद्र सरकार ने ग्रामीण गरीबों को ग्रामजी कानून का झुनझुना थमा दिया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों की भयावह स्थिति है। काम पाने के संवैधानिक कानून मनरेगा कि हत्या कर दिए जाने से गरीबों को कोई काम नहीं मिल रहा है। ग्रामीण गरीबों, मजदूरों का जीवन संकट में है। नया ग्रामजी कानून ग्रामीण गरीबों के साथ सिर्फ धोखा है, सरकार के पास इसे लागू करने की भी कोई तैयारी नहीं है। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट परस्त, मजदूर विरोधी लेबर कोड्स लागू किए जाने के बाद मनरेगा की हत्या, मजदूरों के खिलाफ खुला युद्ध है। गरीबों, मजदूरों पर जबरन थोपे गए इस युद्ध का मुकम्मल जवाब दिया जाएगा। निर्माण और अन्य असंगठित मजदूर मांग करता है कि मजदूरों का शोषण बढ़ाने वाला चार लेबर कोड्स रद्द किया जाय, 700 रुपए प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी और साल में 200 दिन काम की गारंटी के साथ मनरेगा की पुनर्बहाली की जाय और मजदूर आंदोलनों के दमन पर रोक लगायी जाय।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर