जंतर-मंतर पर जारी अनशन के समर्थन में धरना

 


भागलपुर, 19 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली के जंतर मंतर पर पेपर लीक, ध्वस्त होती शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा सुधार की मांग को लेकर जारी अनशन के समर्थन में रविवार को भागलपुर के नागरिक समाज की ओर से दीप नारायण सिंह स्मारक (घंटाघर चौक) पर एक दिवसीय धरना आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संयोजन निर्मल कुमार ने किया, जबकि सभा का संचालन गौतम कुमार ने किया।

धरना में गांधीवादी, मार्क्सवादी, अंबेडकरवादी सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं, सांस्कृतिकर्मी, कलाकार, फिल्मकार, रंगकर्मी तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के लगभग 60 लोगों ने भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए शीला और शिवांगी ने कहा कि जंतर मंतर पर छात्र-छात्राओं द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा पेपर लीक के खिलाफ किया जा रहा अनशन देश के करोड़ों युवाओं की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।

उन्होंने कहा कि अनशनकारी सोनम वांगचुक की अलोकतांत्रिक तरीके से की गई गिरफ्तारी लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है। उन्होंने देश के युवाओं और अभिभावकों से शिक्षा में गुणात्मक सुधार के इस आंदोलन के साथ खड़े होने का आह्वान किया। स्मिता और आशा ने कहा कि नई शिक्षा नीति देश की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाली नीति है।

उनके अनुसार शिक्षा को समान अवसर और सामाजिक न्याय का माध्यम बनाने के बजाय उसे बाज़ारोन्मुख बनाया जा रहा है, जिसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव गरीब और वंचित तबकों के छात्रों पर पड़ रहा है। अन्य वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र की पहचान संवाद से होती है, जबकि तानाशाही की पहचान दमन और प्रहार से। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनसंवाद के बजाय असहमति की आवाज़ों को दबाने का रास्ता अपना रही है। वक्ताओं ने कहा कि केवल नीट ही नहीं, बल्कि अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों का बार-बार लीक होना देश की शिक्षा व्यवस्था में गहरे संकट का संकेत है। प्रश्नपत्र लीक होने का अर्थ है कि गरीब, मेहनती और योग्य छात्रों के अवसर छीनकर उन्हें धनबल और प्रभाव रखने वाले लोगों के पक्ष में स्थानांतरित कर देना। उन्होंने तथाकथित सॉल्वर गैंग जैसी संगठित आपराधिक गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक जैसे शिक्षाविद् और सामाजिक चिंतक को जिस प्रकार मंच से जबरन हटाकर गिरफ्तार किया गया, वह अत्यंत निंदनीय है और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। सभा के अंत में केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलनों का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की गई। धरना में स्मिता कुमारी, शीला कुमारी, शिवांगी, रूपम कुमारी, आशा कुमारी, सुषमा, सुभाष प्रसाद, रितेश कुमार, आलोक यादव, प्रवीण कुशवाहा, प्रकाश चंद्र गुप्ता, मो. शाहबाज, मंजर आलम, उज्ज्वल घोष, मो. तारिक अंसारी, मो. शादाब, उदय, निर्मल कुमार,आर्याना मिश्रा, सुरेश, मो. नूरजहां वारसी, सत्यम कुमार सहित अन्य उपस्थित हुए।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर