प्रधानाध्यापक निलंबित, अनधिकृत अनुपस्थिति समेत कई गंभीर आरोप
सुपौल, 07 अक्टूबर (हि.स.)। जिले के निर्मली प्रखंड स्थित परियोजना बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, निर्मली की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर जिला शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक रूपेश कुमार पाठक को अनधिकृत अनुपस्थिति समेत कई आरोपों के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन्हें विभागीय कार्रवाई के अधीन भी किया गया है। यह कार्रवाई प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, निर्मली की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी, सुपौल कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, निर्मली ने 5 अक्टूबर 2026 को पत्रांक 473 के माध्यम से विद्यालय के निरीक्षण से संबंधित जांच रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट के मुताबिक 1 अक्टूबर 2026 को अपराह्न करीब 2:14 बजे विद्यालय का निरीक्षण किया गया। इस दौरान प्रधानाध्यापक रूपेश कुमार पाठक विद्यालय में अनुपस्थित पाए गए। जांच के दौरान ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर उनके कार्यालय कार्य के लिए ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ दर्ज होने की बात भी सामने आई।
जांच रिपोर्ट में प्रधानाध्यापक पर बिना सक्षम अनुमति अथवा सूचना के विद्यालय से अनुपस्थित रहने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2026 में वे 14 दिन, अगस्त में सात दिन और सितंबर में सात दिन तक अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे। वहीं ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर जुलाई में दो दिन और अगस्त में तीन दिन उन्हें अनुपस्थित प्रदर्शित किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
विभाग ने इन तथ्यों को गंभीर अनुशासनहीनता के रूप में लिया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रधानाध्यापक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। विद्यालय में छात्राओं की उपस्थिति को लेकर भी निरीक्षण के दौरान गंभीर अंतर सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार विद्यालय में कुल 222 छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन निरीक्षण के समय महज 59 छात्राएं ही भौतिक रूप से उपस्थित मिलीं। दूसरी ओर उपस्थिति पंजी में 161 छात्राओं की उपस्थिति दर्ज थी। भौतिक रूप से मौजूद छात्राओं और उपस्थिति पंजी में दर्ज संख्या के बीच बड़े अंतर को जांच में महत्वपूर्ण बिंदु माना गया है। इस अंतर को लेकर भी विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है। निरीक्षण के दौरान मौजूद छात्राओं से भी जानकारी ली गई। छात्राओं ने जांच टीम को बताया कि विद्यालय में निर्धारित समय-सारणी के अनुसार नियमित रूप से शिक्षण कार्य नहीं होता है। छात्राओं ने विद्यालय में स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने तथा जरूरत के अनुसार कक्षाओं में पंखे उपलब्ध नहीं होने की बात भी बताई। जांच के दौरान विद्यालय में स्थापित आईसीटी लैब के नियमित उपयोग नहीं होने की बात भी सामने आई। इससे विद्यालय में डिजिटल शिक्षा और उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
प्राप्त आरोपों एवं जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय ने बिहार विद्यालय विशिष्ट शिक्षक (संशोधन) नियमावली, 2024 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है। आदेश में नियम 11.2 (ख, ज, ड) के तहत रूपेश कुमार पाठक को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय कार्रवाई के अधीन किए जाने की जानकारी दी गई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, प्रतापगंज निर्धारित किया गया है। आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
आरोप पत्र अलग से होगा निर्गत
विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रधानाध्यापक के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की विस्तृत विभागीय कार्रवाई आगे जारी रहेगी। आरोप पत्र अलग से निर्गत किया जा रहा है, ताकि संबंधित प्रधानाध्यापक को अपना पक्ष रखने का अवसर मिल सके। विभागीय जांच के बाद ही आरोपों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रधानाध्यापक के निलंबन की कार्रवाई के साथ विद्यालय की समग्र शैक्षणिक एवं आधारभूत व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। एक तरफ सरकारी विद्यालयों में नियमित शिक्षण, डिजिटल शिक्षा और छात्राओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं निरीक्षण के दौरान कम भौतिक उपस्थिति, उपस्थिति पंजी और वास्तविक उपस्थिति में अंतर, आईसीटी लैब के उपयोग नहीं होने तथा मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र