राजस्व विभाग के प्रधान सचिव का फरमान-संविधान के अनुच्छेद-14 समता सिद्धांत का हर हाल में करना होगा पालन

 

पटना, 01 जनवरी (हि.स.)।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने नववर्ष के पहले दिन गुरुवार को सभी राजस्व पदाधिकारियों को पत्र लिखा है। इस पत्र में सरकार ने संविधान के अनुच्छेद-14 और समता सिद्धांत का अनिवार्य रूप से पालन करने को लेकर सख्त हिदायत दी है, ताकि समान परिस्थिति वाले मामलों में समान निर्णय सुनिश्चित हो सके।

पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार के सात निश्चय पार्ट-3 के स्तंभ-7 “सबका सम्मान–जीवन आसान के लक्ष्य को साकार करने के लिए राजस्व प्रशासन में मनमानी पर रोक लगाना आवश्यक है। भूमि सुधार जन कल्याण संवाद-2025 के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई मामलों में विधिक ज्ञान और प्रशिक्षण के अभाव में समान मामलों में भिन्न-भिन्न आदेश पारित किए जा रहे हैं, जो न केवल अनुच्छेद-14 का उल्लंघन है, बल्कि लोक विश्वास को भी कमजोर करता है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, अतिक्रमण हटाने, जमाबंदी कायम करने, पट्टा देयता तथा सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में एकरूप, निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई अपेक्षित है। समाहर्ताओं को इन मामलों में कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पहचान देखकर आदेश देना, दबाव में भिन्न व्यवहार करना, समान मामलों में अलग-अलग आदेश पारित करना और चयनात्मक सख्ती जैसे कृत्य पूर्णतः निषिद्ध हैं। ऐसे कार्य न केवल विधिक शासन के विरुद्ध हैं, बल्कि राजस्व प्रशासन की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगाते हैं।इसके तहत सभी राजस्व पदाधिकारियों को आदेश पारित करते समय सकारण देने, तथ्यों की तुलनात्मक विवेचना करने तथा यदि समान मामलों में अलग निर्णय लिया गया हो तो उसका स्पष्ट कारण दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। इन दिशा-निर्देशों के सख्त अनुपालन की जिम्मेदारी जिला समाहर्ताओं को सौंपी गई है।

विजय सिन्हा बोले- न्याय सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा इस बाबत बताया कि राजस्व प्रशासन में समानता, पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। संविधान के अनुच्छेद-14 के अनुरूप समान परिस्थिति वाले मामलों में समान निर्णय देना प्रत्येक राजस्व पदाधिकारी का दायित्व है। किसी भी स्तर पर मनमानी, भेदभाव या दबाव में लिया गया निर्णय स्वीकार्य नहीं होगा। राज्य सरकार के सात निश्चय के तहत ‘सबका सम्मान–जीवन आसान’ के लक्ष्य को तभी साकार किया जा सकता है, जब आम नागरिक को यह भरोसा हो कि उसकी जमीन और अधिकारों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष एवं एकरूप कार्रवाई होगी। भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, जमाबंदी, अतिक्रमण और सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में सभी अधिकारियों को स्पष्ट, सकारण और विधिसम्मत आदेश पारित करने होंगे।

विजय सिन्हा ने सभी समाहर्ता एवं राजस्व पदाधिकारियों से अपेक्षा किया है कि, वे इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी